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: गरियाबंद में 6 महीने भी नहीं टिके CEO मरकाम: IAS प्रखर संभालेंगे कमान, गैर-राजपत्रित अधिकारी को कमान सौंपना पड़ा भारी, मनमानी-अनियमितताओं पर गिरी गाज!

गरियाबंद जिले के जिला पंचायत सीईओ जी.आर. मरकाम को महज 6 महीने में ही पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह अब 2022 बैच के आईएएस प्रखर चंद्राकर को नया जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) बनाया गया है। राज्य शासन ने यह आदेश जारी किया। मरकाम की नई पदस्थापना कहां की गई है, इसकी पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

गृह जिला में भी नहीं संभाल पाए संतुलन, सबसे कम कार्यकाल वाले सीईओ बने

फरवरी 2025 में पंचायत चुनाव के दौरान धमतरी में डिप्टी कलेक्टर पद पर रहते हुए मरकाम ने अपनी पोस्टिंग गृह जिला गरियाबंद में करवा ली थी। लेकिन जिला प्रशासन में समन्वय और संतुलन स्थापित करने में वे नाकाम रहे, जिस कारण उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले ही हटना पड़ा। मरकाम अब तक के सबसे कम अवधि में हटाए गए जिला पंचायत सीईओ माने जा रहे हैं।

गैर-राजपत्रित अधिकारी के हाथों अहम पद सौंपना पड़ा भारी

जिले में लंबे समय से करारोपण अधिकारी नागेश, जो गैर-राजपत्रित हैं, उन्हें तीन महत्वपूर्ण पदों—जिला अंकेक्षक, सहायक संचालक पंचायत और गरियाबंद जनपद पंचायत के सीईओ की जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। यह सभी पद न केवल कार्यालय प्रमुख के स्तर के थे, बल्कि वित्तीय अधिकार जैसे आहरण एवं संवितरण का भी दायित्व देते हैं। जबकि 1 अप्रैल 2025 को मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया था कि ऐसे पद केवल राजपत्रित अधिकारियों को ही सौंपे जा सकते हैं।

जिला पंचायत सदस्य ने की थी लिखित शिकायत

जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने 14 जुलाई को सचिव सोनमणि बोरा औऱ संचालक प्रियंका महोबिया को इसकी लिखित शिकायत सौंपी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि जिले की वास्तविक कमान करारोपण अधिकारी नागेश ही चला रहे हैं, जबकि सीईओ की भूमिका कमजोर हो गई थी।

पीएम आवास में बोगस प्रगति, सचिव तबादलों में मनमानी

पीएम आवास योजना की प्रगति रिपोर्ट में भारी गड़बड़ियां सामने आईं। जिले के 200 से अधिक अधूरे मकानों को जियो टैग करने के लिए हितग्राहियों को अन्य पूर्ण मकानों के सामने खड़ा कर तस्वीरें खिंचवाई गईं। इस बोगस रिपोर्टिंग के चलते मनरेगा मजदूरी की लगभग 5 करोड़ रुपए की राशि लेप्स हो गई।

इसके अलावा, पंचायत चुनाव के दौरान आचार संहिता के बावजूद 40 पंचायतों में सचिवों ने राशि आहरण कर बोगस निर्माण दिखाया। पंचायत संचालक ने संबंधित फाइलों को बिना जवाब प्राप्त किए क्लोज कर दिया। बाद में सचिवों के तबादले में मनचाहे आदेश और संशोधन कर मनमानी की गई। प्रभारी मंत्री के आदेश के बावजूद एक प्रभावशाली सचिव को जिले से बाहर नहीं भेजा गया।

असंतोष और आगामी हंगामे के चलते कार्रवाई

इन घटनाओं के चलते जिला पंचायत अध्यक्ष, सभापति एवं सदस्यों में भारी असंतोष उत्पन्न हो गया था। आगामी 30 जुलाई को होने वाली सामान्य सभा में हंगामे की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मरकाम को पद से हटा दिया।

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