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ED Raid On NHAI Toll Plaza Fraud : MP समेत 14 राज्यों में ED की छापेमारी; टोल वसूली में Fake Receipt का खेल कैसे हुआ ?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने NHAI Toll Plaza पर कथित फर्जी टोल वसूली और रकम की हेराफेरी के मामले में देशभर में बड़ी कार्रवाई शुरू की है। एजेंसी की लखनऊ जोनल ऑफिस की टीमों ने Money Laundering Act (PMLA) के तहत एक साथ 14 राज्यों में कई ठिकानों पर Search Operation शुरू किया है। मध्य प्रदेश में भी कई Locations जांच के दायरे में हैं। कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी कथित फर्जीवाड़े से जुड़े Digital Evidence और Financial Transactions की पड़ताल कर रही है।

टोल वसूली में Fake Receipt का खेल कैसे हुआ?

ED की जांच के मुताबिक, NHAI के टोल प्लाजा पर टोल वसूली के लिए कथित तौर पर Unauthorized Software Application का इस्तेमाल किया जा रहा था। इस Software के जरिए फर्जी टोल रसीदें तैयार किए जाने का आरोप है। जांच एजेंसी को आशंका है कि इसी प्रक्रिया के जरिए टोल प्लाजा से वसूली गई रकम का एक हिस्सा NHAI के Official Accounting System से बाहर डायवर्ट किया गया।

यानी टोल वसूली तो हो रही थी, लेकिन कथित तौर पर पूरी रकम NHAI के आधिकारिक हिसाब-किताब में दर्ज नहीं की जा रही थी। ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित सिस्टम के पीछे कौन लोग थे और इससे किसे आर्थिक फायदा मिला।

MP समेत 14 राज्यों में ED की छापेमारी

ED के लखनऊ जोनल ऑफिस की टीमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता समेत कई Locations पर तलाशी ले रही हैं। यह कार्रवाई PMLA की Section 17 के तहत की जा रही है।

तलाशी के दौरान एजेंसी का फोकस ऐसे Documents, Electronic Devices, Digital Records और अन्य Evidence पर है, जिनसे कथित टोल फर्जीवाड़े और रकम की हेराफेरी की कड़ियां जुड़ सकती हैं। मध्य प्रदेश में किन-किन ठिकानों पर कार्रवाई चल रही है, इसकी विस्तृत जानकारी जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकती है।

Forensic जांच में सामने आया Unauthorized Software

ED के अनुसार, NHAI के Records और Forensic Examination में अनधिकृत Software के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। जांच एजेंसी अब यह समझने की कोशिश कर रही है कि Software किस तरह काम करता था, इससे कितनी फर्जी Receipts तैयार की गईं और टोल से मिली रकम को किस तरीके से Official Accounting System से बाहर किया गया।

जांच का एक अहम हिस्सा कथित Financial Trail भी है। ED उन लोगों और संस्थाओं की पहचान करने में जुटी है, जिन्हें इस कथित फर्जीवाड़े से आर्थिक लाभ मिला।

FIR और ECIR के आधार पर Money Laundering की जांच

ED की यह कार्रवाई 22 जनवरी 2025 को दर्ज FIR संख्या 17 और 19 मई 2025 को दर्ज ECIR संख्या ECIR/ASZO/04/2025 के आधार पर की जा रही है। एजेंसी अब मूल मामले से जुड़े तथ्यों के साथ कथित Money Laundering और उससे जुड़े Financial Network की जांच कर रही है।

फिलहाल Search Operation जारी है। ED का उद्देश्य कथित फर्जी टोल वसूली से जुड़े Digital और Documentary Evidence जुटाना, पूरे Network के Beneficiaries की पहचान करना और अपराध से अर्जित रकम का पता लगाना है। तलाशी पूरी होने और जांच आगे बढ़ने के बाद ही कथित घोटाले में शामिल लोगों, रकम और पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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