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: Chhattisgarh: बीजेपी को उसी के हथियार से मात दे रहे भूपेश बघेल, पहले चेहरा तलाशे या मुद्दा?

News Desk / Thu, Dec 8, 2022


छत्तीसगढ़ में भानुप्रतापपुर उपचुनाव के नतीजों से स्पष्ट है कि बीजेपी के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रहीं। सीएम भूपेश बघेल की रणनीति के सामने बीजेपी पस्त नजर आ रही है। हिंदुत्व के मुद्दे पर भी बघेल उसे लगातार मात दे रहे हैं। गंभीर समस्या यह है कि राज्य में बघेल से मुकाबले के लिए बीजेपी के पास कोई सर्वमान्य चेहरा नहीं है।

 

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हाइलाइट्स

  • छत्तीसगढ़ में लगातार पांचवें उपचुनाव में बीजेपी की हार
  • भानुप्रतापपुर में तीसरे नंबर पर पहुंच गई बीजेपी
  • सीएम भूपेश बघेल की रणनीति का मुकाबला नहीं कर पा रही बीजेपी
रायपुरः छत्तीसगढ़ में बीजेपी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही। 2018 में कांग्रेस के हाथों सत्ता गंवाने के बाद से बीजेपी को लगातार हारों का सामना करना पड़ रहा है। गुरुवार को भानुप्रतापपुर विधानसभा सीट के लिए हुए चुनाव में तो पार्टी तीसरे नंबर पर पहुंच गई। 2018 के बाद से प्रदेश में पांच उपचुनाव हुए हैं और हर बार पार्टी को हार मिली है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की रणनीति के सामने बीजेपी की एक नहीं चल पा रही। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बघेल बीजेपी के ही हथियार को उसके खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरा बड़ा कारण यह है कि रमन सिंह के बाद बीजेपी छत्तीसगढ़ में अब तक कोई सर्वमान्य चेहरा नहीं ढूंढ पाई है। अब जबकि विधानसभा चुनावों में एक साल से भी कम समय बचा है, बीजेपी के सामने चेहरे के साथ मुद्दे तलाशने की भी चुनौती है।

बघेल का हिंदुत्व मॉडल बीजेपी पर भारी


बीजेपी की चुनावी रणनीति में हिंदुत्व का अहम स्थान होता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में बघेल ने इसकी काट ढूंढ ली है। बघेल अक्सर मंदिरों में जाते हैं। राम गमन पथ प्रोजेक्ट पर खुद नजर रखते हैं। इस सबसे बढ़कर उन्होंने गाय और गोबर को आम लोगों की आमदनी का जरिया बना दिया है। उनकी सरकार गौपालकों से गौमूत्र और गोबर खरीदती है। बघेल के हिंतुत्व मॉडल ने बीजेपी के हाथ से उसका सबसे बड़ा हथियार छीन लिया है।

बीजेपी को नहीं मिल रहा चेहरा


बीजेपी के लिए एक बड़ी समस्या चेहरे की है जो बघेल से मुकाबला कर सके। डॉ रमन सिंह के बाद बीजेपी ऐसा कोई चेहरा ढूंढने में अब तक असफल रही है। प्रदेश संगठन को पूरी तरह बदलने के बाद भी पार्टी को ऐसा चेहरा अब तक नहीं मिल पाया है। ब्रजमोहन अग्रवाल जैसे कई नेता सक्रिय हैं, लेकिन उनकी सर्वमान्य स्वीकार्यता नहीं है।

बीजेपी की चुनौती, पहले क्या करे


छत्तीसगढ़ कांग्रेस में गुटबाजी किसी से छुपी नहीं है। 2018 के बाद से ही बघेल और टीएस सिंहदेव के बीच का विवाद कई बार उबाल ले चुका है। इसके बावजूद बीते चार वर्षों में हुए सभी उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। भूपेश बघेल के सामने छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सारी रणनीति अभी तक असफल साबित हुई है। बीजेपी की चुनौती यह है कि करीब 11 महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले वह क्या करे- चेहरा तलाशे या मुद्दा। हर जगह अपनी चुनावी रणनीति से कामयाबी की इबारत लिखने वाले पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती है।

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