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गरियाबंद में खाली ऑक्सीजन सिलेंडर, एंबुलेंस में मौत : इलाज व्यवस्था पर उठे सवाल, अस्पताल में हंगामा, डॉक्टर से तीखी बहस

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में 35 वर्षीय निमोनिया मरीज की एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं मिलने से मौत हो गई। एंबुलेंस में लगा ऑक्सीजन सिलेंडर पूरी तरह खाली था, जिसके कारण रास्ते में ही मरीज ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है।

मरीज की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। अस्पताल परिसर में परिजनों और महिला डॉक्टर के बीच तीखी बहस हुई। परिजनों ने डॉक्टर से विनम्रता से बात करने को कहा, जिस पर डॉक्टर ने कथित रूप से जवाब दिया — “ऐसे लोगों के लिए मेरे पास विनम्रता नहीं है।” इस बयान के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया।

शव ले जाने से रोका तो सड़क पर खड़ी कर दी एंबुलेंस

विवाद उस समय और बढ़ गया जब परिजनों ने शव को उसी एंबुलेंस से घर ले जाने की मांग की। अस्पताल प्रबंधन ने मना करते हुए 108 एंबुलेंस बुलाने को कहा। इससे नाराज परिजनों ने एंबुलेंस को सड़क पर खड़ा कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

हालात बिगड़ते देख पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश के बाद मामला शांत कराया गया।

CMHO ने बनाई 4 सदस्यीय जांच कमेटी

घटना के बाद सीएमएचओ यूएस नवरत्न ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। टीम को 36 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि बिना पर्याप्त लाइसेंस या संसाधनों के मरीज का इलाज कैसे किया जा रहा था।

रात में भर्ती, सुबह रेफर — परिजनों ने लगाया टालमटोल का आरोप

परिजनों के मुताबिक, बसंत देवांगन को शनिवार रात करीब 8 बजे सोमेश्वर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार सुबह अस्पताल ने बताया कि मरीज को निमोनिया है और उसकी पसली की हड्डी भी टूटी हुई है। हालत गंभीर बताकर रायपुर रेफर करने की बात हुई।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन मरीज को बाहर भेजने में टालमटोल करता रहा।

“अगर मरना है तो यहीं मरेगा” — परिजनों का आरोप

परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल स्टाफ ने यह तक कह दिया कि “अगर मरना ही है तो यहीं मरेगा।” हालांकि इस बयान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिजन मरीज को हर हाल में रायपुर ले जाना चाहते थे।

देर से मिली एंबुलेंस, ड्राइवर भी नहीं

परिजनों का कहना है कि अस्पताल ने जानबूझकर एंबुलेंस देने में देरी की। पहले ड्राइवर नहीं होने की बात कही गई। बाद में मरीज का भाई खुद एंबुलेंस चलाने को तैयार हुआ।

जब एंबुलेंस दी गई तो उसमें न पैरामेडिकल स्टाफ था और न ही ऑक्सीजन की सही जांच की गई थी।

5 किलोमीटर बाद बिगड़ी हालत, रास्ते में मौत

गरियाबंद से करीब 5 किलोमीटर आगे बढ़ते ही मरीज की हालत तेजी से बिगड़ने लगी। पांडुका के पास एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में पता चला कि एंबुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर पूरी तरह खाली था।

पुलिस पहुंची, समझाइश के बाद शांत हुआ मामला

मामले की जानकारी मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। काफी समझाइश के बाद परिजनों का प्रदर्शन खत्म हुआ और शव को एंबुलेंस से घर ले जाया गया।

परिजन अब अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई और लापरवाही की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

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