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: चार जजों को सुप्रीम कोर्ट में प्रोन्नत करने के सीजेआई के कदम पर गतिरोध जारी

News Desk / Wed, Oct 5, 2022


IANS | Edited By : IANS | Updated on: 05 Oct 2022, 06:34:38 PM
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(source : IANS) (Photo Credit: (source : IANS))

नई दिल्ली:  

भारत के प्रधान न्यायाधीश यू.यू. ललित के नेतृत्व वाला कॉलेजियम सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के चार खाली पदों को भरने के लिए केंद्र को किसी नाम की सिफारिश करने में सक्षम नहीं हो सकता, क्योंकि प्रोन्नति देकर नए जज नियुक्त करने के उसके प्रस्ताव पर गतिरोध जारी है. पता चला है कि शीर्ष अदालत के पांच सदस्यीय कॉलेजियम में से दो सदस्यों ने औपचारिक बैठक के बजाय एक लिखित नोट के माध्यम से शीर्ष अदालत में चार नए न्यायाधीशों को नियुक्त करने के प्रस्ताव का विरोध किया है. विरोध करने वालों में शीर्ष अदालत के एक वकील भी शामिल हैं. प्रधान न्यायाधीश ललित 8 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं और शीर्ष अदालत 10 अक्टूबर को फिर से खुलने वाली है.

सूत्रों के मुताबिक, जिन दो जजों ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए जजों की सिफारिश करने के लिखित प्रस्ताव का विरोध किया है. भारत के प्रधान न्यायाधीश कॉलेजियम के प्रमुख हैं. उन्होंने इसके चार सदस्यों - जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, एस.के. कौल, एस. अब्दुल नजीर और के.एम. जोसेफ से इस महीने की शुरुआत में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रविशंकर झा, पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजय करोल, मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पी.वी. संजय कुमार और वरिष्ठ अधिवक्ता के.वी. विश्वनाथन को प्रोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट में लाने के बारे में उनकी राय मांगी थी.

कॉलेजियम के एक सदस्य ने कहा था कि उन्हें सीजेआई के प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं है. हालांकि, दो न्यायाधीशों ने कहा कि शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की नियुक्ति की यह प्रक्रिया सही नहीं है. एक महीने का नियम प्रधान न्यायाधीश ललित को 8 अक्टूबर के बाद कॉलेजियम की बैठक आयोजित करने की अनुमति नहीं देगा, जबकि शीर्ष अदालत दो दिन बाद फिर से खुलेगी. सीजेआई ने एक लिखित प्रस्ताव 30 सितंबर को निर्धारित कॉलेजियम की बैठक के बाद प्रसारित किया, जो दशहरा की छुट्टी से पहले अंतिम कार्य दिवस था, इसलिए न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने रात 9 बजे के बाद तक मामलों की सुनवाई की थी.

परंपरा के अनुसार, सरकार अपने उत्तराधिकारी को नामित करने के लिए निवर्तमान सीजेआई को लिखती है और सीजेआई सेवानिवृत्ति से एक महीने पहले सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश के नाम की सिफारिश करता है. नाम की सिफारिश के बाद वर्तमान सीजेआई आमतौर पर नए न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश पर निर्णय नहीं लेता है, और इसे नए सीजेआई पर छोड़ देता है.

सीजेआई ललित की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने अब तक बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है. शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक बयान में कहा गया है : सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 26 सितंबर, 2022 को हुई अपनी बैठक में बॉम्बे हाईकोर्ट (पीएचसी : कलकत्ता) के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत करने की सिफारिश की है. न्यायमूर्ति दत्ता के माता-पिता कलकत्ता हाईकोर्ट में हैं.

इस समय शीर्ष अदालत 34 न्यायाधीशों की स्वीकृत शक्ति के मुकाबले 29 न्यायाधीशों के साथ काम कर रही है.

First Published : 05 Oct 2022, 06:34:38 PM

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