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: नहीं रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. अजीज कुरेशी: कई राज्यों के रह चुके थे राज्यपाल, 83 वर्ष की उम्र में ली अंतिस सांस, बेबाकी थी इनकी अलग पहचान

Senior Congress leader Dr. Aziz Qureshi passes away: वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. अजीज कुरेशी का निधन हो गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मिजोरम के राज्यपाल डॉ. कुरेशी 83 वर्ष के थे। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। तबीयत खराब होने के कारण उन्हें हाल ही में भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शुक्रवार को अस्पताल में ही उन्होंने आखिरी सांस ली। डॉ. अज़ीज़ क़ुरैशी का जन्म 24 अप्रैल 1940 को भोपाल में हुआ था। वह 1984 में मध्य प्रदेश के सतना से लोकसभा चुनाव में सांसद चुने गए। कुरेशी मध्य प्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति के सचिव, भारतीय युवा कांग्रेस के संस्थापक सदस्य और 1973 में मध्य प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में मंत्री भी थे। 24 जनवरी 2020 को मध्य प्रदेश की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने कुरेशी को मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी का अध्यक्ष नियुक्त किया था। उनके जनाजे की नमाज के बाद रात 8:30 बजे सूफिया मस्जिद में नमाज-ए-जनाजा अदा की जाएगी। उन्हें भोपाल टॉकीज के पीछे बड़ा बाग कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. अजीज कुरेशी के निधन का दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। मैं उनके निधन पर शोक व्यक्त करता हूं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोक संतप्त परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति दें। भोपाल में जन्म, आगरा में पढ़ाई 24 अप्रैल 1940 को जन्मे डॉ. अज़ीज़ क़ुरैशी की शिक्षा उत्तरी आगरा और भोपाल में हुई। अपनी राजनीतिक पारी में उन्होंने मध्य प्रदेश के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी तीखे तेवरों के साथ मौजूदगी दिखाई। कांग्रेस के खाते से बने थे उत्तराखंड के राज्यपाल। उन्होंने इस पद पर उत्तर प्रदेश और मिजोरम में अतिरिक्त जिम्मेदारी के साथ भी काम किया। वह सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी जुड़े रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस से जुड़े और उनके करीबी रहे डॉ. कुरेशी पार्टी में विभिन्न पदों पर भी रहे। अपनी बेबाक बोली और अधिकारों के लिए अड़े रहने वाले क़ुरैशी अपने आखिरी दिनों तक भी अपनी आवाज़ उठाते रहे। बेबाकी से अलग पहचान डॉ. अज़ीज़ क़ुरैशी अपनी स्पष्टवादिता और स्पष्टवादिता के कारण राजनीति में विशेष पहचान रखते थे। कई मुद्दों पर उनकी पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व से अक्सर झड़प होती रहती थी। गवर्नर पद से रिटायर होने के बाद डॉ. अजीज कुरेशी ने कई बार पार्टी की उन व्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई, जिसमें मुस्लिम राजनीति को हाशिए पर रखा जाता था। उन्होंने संगठन में मुस्लिम नेतृत्व और पार्टी के पोस्टरों और बैनरों से मुस्लिम नेताओं की तस्वीरें हटाने के खिलाफ भी विरोध की आवाज उठाई। बीमारी के दौरान भी सक्रिय रहें 83 साल की उम्र में पहुंच चुके डॉ. अजीज कुरैशी लंबे समय से बीमार थे। मोटापे और कई बीमारियों के कारण उन्हें चलने-फिरने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। इसके बावजूद वे राजनीति और सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहे। राजधानी भोपाल के इकबाल मैदान में उनके समर्थकों द्वारा आयोजित होने वाला सालाना मुशायरा भी खास पहचान रखता है। डॉ. अज़ीज़ क़ुरैशी ने अपने जीवनकाल में शादी नहीं की। इस वजह से उनकी राजनीतिक विरासत संभालने वाला कोई नहीं है। उनके निधन के बाद राज्य की मुस्लिम राजनीति में एक बड़ा खालीपन महसूस किया जा रहा है। Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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