पुरानी पेंशन को लेकर कर्मचारियों का प्रदर्शन
- फोटो : Amar Ujala Digital
ख़बर सुनें
ख़बर सुनें
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश में पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग तेज होने लगी है। आज उज्जैन में भी पुरानी पेंशन बहाली और प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संघ के महाकुंभ में प्रदेश भर के अधिकारी और कर्मचारी सम्मिलित हुए। इन्होंने सामाजिक न्याय परिसर में महाकुंभ के दौरान प्रदेश सरकार को जल्द से जल्द उनकी मांगें मानने की बात कही।
साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना जाता है तो आगामी पांच फरवरी को भोपाल में एक बड़ा महाकुंभ आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनाव में संघ के सभी कर्मचारी और पदाधिकारी विपक्ष का साथ देंगे। महाकुंभ के बाद नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संघ के अधिकारी और कर्मचारी हाथों में तख्तियां लेकर चामुंडा माता चौराहा फ्रीगंज ओवरब्रिज से होते हुए टावर चौक पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम पर तहसीलदार मिश्रा को एक ज्ञापन सौंपा।
झूठे सपने दिखाए गए नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु व वरिष्ठ प्रांतिय उपाध्यक्ष शेख मोहम्मद हनीफ ने बताया कि नेशनल पेंशन स्कीम के दायरे में कर्मचारियों को शामिल करते समय झूठे सपने दिखाए गए थे। जब कर्मचारी बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त हो रहा है तो हकीकत सामने आ रही है। कर्मचारियों को दिखाए गए सपने चकनाचूर हो गए हैं। सेवानिवृत्ति के पश्चात पेंशन के नाम पर अत्यधिक कम राशि 500, 800, 1500 प्राप्त हो रही है। इसमें जीवन यापन संभव नहीं। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखकर अविलंब पुरानी पेंशन बहाल करनी चाहिए।
कर्मचारियों में बढ़ रहा आक्रोश
वहीं, नेशनल मुवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संघ के उपाध्यक्ष वितेश खांडेकर ने बताया कि मध्यप्रदेश में एक जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारी नेशनल पेंशन स्कीम के दायरे में आता है, जिनको सेवानिवृत्ति के बाद बहुत कम राशि पेंशन के नाम पर प्राप्त हो रही है। इस कारण से कर्मचारी आक्रोशित हैं और मध्यप्रदेश सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976 के नियमों के अनुसार पेंशन बहाली के लिए लामबंद हो चुका है।
कर्मियों का पैसा उद्योगपतियों की झोली में डाला जा रहा नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संघ के प्रदेश संगठन मंत्री व मिडिया प्रभारी रामचरण शर्मा ने महाकुंभ के दौरान कहा कि कर्मचारी और शासन का अंश मिलाकर 24% राशि प्रतिमाह शेयर बाजार के हवाले की जा रही है, जो उतार चढ़ाव के अधीन है। कर्मचारियों की मेहनत का पैसा शेयर बाजार के माध्यम से उद्योगपतियों की झोली में व्यवसाय हेतु डाला जा रहा है जो घोर आपत्तिजनक है।
अब भोपाल में होगा प्रदर्शन नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संघ के उज्जैन सदस्य डॉ. कैलाश बारेड़ ने बताया कि हम अपनी पुरानी पेंशन बहाली और वरिष्ठता की मांग को लेकर महेश्वर, जबलपुर, मैहर और उज्जैन में भी पेंशन महाकुंभ का आयोजन कर चुके हैं। जब तक हमारी मांग मान नहीं ली जाती तब तक पेंशन महाकुंभ का दौर जारी रहेगा। हम भविष्य में ग्वालियर, इंदौर में भी पेंशन महाकुंभ का आयोजन करेंगे और एक बड़ा सम्मेलन राजधानी भोपाल में भी करेंगे। मध्यप्रदेश सरकार ने हमारी बात नहीं सुनी तो विपक्ष के पास जाने में भी संकोच नहीं करेंगे, क्योंकि उन्होंने अन्य राज्यों पेंशन दी है और छिंदवाड़ा की राह भी पकड़ेंगे।
विस्तार
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मध्यप्रदेश में पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग तेज होने लगी है। आज उज्जैन में भी पुरानी पेंशन बहाली और प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता बहाल करने की मांग को लेकर नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संघ के महाकुंभ में प्रदेश भर के अधिकारी और कर्मचारी सम्मिलित हुए। इन्होंने सामाजिक न्याय परिसर में महाकुंभ के दौरान प्रदेश सरकार को जल्द से जल्द उनकी मांगें मानने की बात कही।
साथ ही चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों को नहीं माना जाता है तो आगामी पांच फरवरी को भोपाल में एक बड़ा महाकुंभ आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनाव में संघ के सभी कर्मचारी और पदाधिकारी विपक्ष का साथ देंगे। महाकुंभ के बाद नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संघ के अधिकारी और कर्मचारी हाथों में तख्तियां लेकर चामुंडा माता चौराहा फ्रीगंज ओवरब्रिज से होते हुए टावर चौक पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम पर तहसीलदार मिश्रा को एक ज्ञापन सौंपा।
झूठे सपने दिखाए गए नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु व वरिष्ठ प्रांतिय उपाध्यक्ष शेख मोहम्मद हनीफ ने बताया कि नेशनल पेंशन स्कीम के दायरे में कर्मचारियों को शामिल करते समय झूठे सपने दिखाए गए थे। जब कर्मचारी बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त हो रहा है तो हकीकत सामने आ रही है। कर्मचारियों को दिखाए गए सपने चकनाचूर हो गए हैं। सेवानिवृत्ति के पश्चात पेंशन के नाम पर अत्यधिक कम राशि 500, 800, 1500 प्राप्त हो रही है। इसमें जीवन यापन संभव नहीं। केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखकर अविलंब पुरानी पेंशन बहाल करनी चाहिए।