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अनूपपुर में 96 दिनों से हाथियों की चिंघाड़ : मकानों को तोड़ रहे, अनाज खा गए, पुष्पराजगढ़ जंगल को बनाया ठिकाना, जानिए कहां-कहां मचाया आतंक ?

मध्य प्रदेश के Anuppur जिले के Ahirgawan वन क्षेत्र में एक भयावह स्थिति बनी हुई है। पिछले 96 दिनों से तीन हाथियों का एक समूह Anuppur Forest Range और Jaitahri Area में विचरण कर रहा है। शनिवार सुबह यह दल Sagon Plantation पहुंचा, जहां विश्राम करने के बाद शाम को Titahi Village की ओर बढ़ गया।

हाथियों का गांव की ओर रुख करना स्थानीय ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय बन गया है। Ahirgawan वन क्षेत्र अधिकारी Ajendra Singh, Bizuri वन क्षेत्र और राजस्व अमला इस पूरे क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।

हाथियों ने किए मकानों और खेतों में तोड़-फोड़

शुक्रवार को हाथियों ने कई मकानों और झोपड़ियों में घुसकर रबी का अनाज खा लिया और खेतों में लगी फसलों को नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।

वन परिक्षेत्र अधिकारी Ajendra Singh ने बताया कि हाथियों द्वारा रात में पहुंचाए गए नुकसान के मद्देनजर ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई। उन्हें जंगल के पास बने घरों में न रहने और सावधान रहने के लिए सार्वजनिक मुनादी भी कराई गई।

पिछले तीन दिनों में तीन मकानों और एक झोपड़ी को नुकसान हुआ। हाथियों ने घर के अंदर रखा अनाज खा लिया और कई किसानों के खेतों में लगी फसलें बर्बाद कर दीं। इससे ग्रामीणों को आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

हाथियों का रूट और पिछले दिन का हाल

इस हाथियों के समूह ने Anuppur District के Jaitahri और Anuppur Forest Range में पिछले 96 दिनों से विचरण किया है। बीच में यह दल Shahdol से Budhar Area भी गया था। लेकिन पिछले चार दिनों से यह समूह Ahirgawan, Pushparajgarh Forests में ठहरा हुआ है।

शुक्रवार रात को Pushparajgarh के पूर्व जनपद अध्यक्ष Shivpal Singh के घर की दीवार तोड़कर हाथियों ने रबी का अनाज खा लिया। इसके अलावा, Tarera निवासी Rajendra Singh के खेत में बनी झोपड़ी को तोड़ा और दो बोरी मसूर खा गए।

ग्रामीण हाथियों को अपने इलाके से दूर भगाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि हाथियों ने इन प्रयासों का जवाब देते हुए ग्रामीणों को डराया और दौड़ाया।

वन और राजस्व विभाग की प्रतिक्रिया

Rajya Forest Department और Revenue Department के Patwari ग्रामीणों के साथ मौके पर पहुंचकर हाथियों द्वारा किए गए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। इसके आधार पर राहत प्रकरण तैयार किया जा रहा है।

वन विभाग लगातार हाथियों की निगरानी कर रहा है और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि हाथियों का मनुष्यों से टकराव न्यूनतम हो, विभाग ने early warning systems और ग्रामीण जागरूकता अभियान शुरू किया है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

Wildlife Experts ने चेतावनी दी है कि हाथियों का लंबा विचरण और गांवों में घुसना ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। हाथियों के ऐसे व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए forest management strategies, elephant corridors, और सुरक्षित relocation measures पर जोर दिया जा रहा है।

ग्रामीणों की मुश्किलें

ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के लगातार आने से फसलें और घरेलू अनाज नष्ट हो रहे हैं। Economic Loss, डर और मानसिक तनाव ग्रामीणों को परेशान कर रहे हैं। ग्रामीणों ने Forest Officials से मांग की है कि हाथियों को safe relocation के लिए कदम उठाए जाएं और भविष्य में ऐसे घटनाओं की रोकथाम के लिए Wildlife Conflict Management को मजबूत किया जाए।

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