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: बाघमाड़ा में 18 साल से बाबा तपस्या में लीन: रहस्यमयी गुफा में रह सकते हैं 2 हजार से ज्यादा लोग, जानिए कौन हैं Baba Lok Ram ?

Chhattisgarh Janakpur Baghmara Cave Baba Lok Ram Story: छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर में जनकपुर के पास चांग देवी मंदिर से करीब 8 किलोमीटर की यात्रा के बाद एक पथरीला रास्ता रैड़ की ओर जाता है। इस रास्ते से बाघमाड़ा गुफा तक पहुंचा जा सकता है।

Chhattisgarh Janakpur Baghmara Cave Baba Lok Ram Story: इस गुफा में सफेद कपड़े पहने एक बाबा पिछले 18 सालों से तपस्या में लीन मिलते हैं। इनका नाम लोक राम बंजारे है। बाबा सालों से इस गुफा में अपनी साधना कर रहे हैं। [caption id="attachment_61263" align="alignnone" width="1024"]  [/caption] 18 साल से तपस्या कर रहे बाबा बाघमाड़ा गुफा अब लोगों की आस्था का केंद्र बन गई है। लोग दूर-दूर से यहां पहुंच रहे हैं। मान्यता है कि यहां आकर जो भी मनोकामना मांगी जाती है, वह पूरी होती है। बाघमाड़ा गुफा के आसपास के गांव के दुर्गा प्रसाद केवट कहते हैं कि यह बहुत अच्छी जगह है। Chhattisgarh Janakpur Baghmara Cave Baba Lok Ram Story: जंगल के अंदर होने के कारण यहां आने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। केवट कहते हैं कि बाघमाड़ा आने वाले हर व्यक्ति की मनोकामना जरूर पूरी होती है। स्थानीय उमाशंकर सिंह बताते हैं कि 17-18 साल पहले जब बाबा आए थे तो कुछ दिन वहां रहने के बाद सीतामढ़ी चले गए थे, लेकिन वे वहां ज्यादा दिन नहीं रुके और फिर इस इलाके में आ गए। उस समय हमने बाबा जी को कई गुफाएं दिखाईं, लेकिन उन्हें वे पसंद नहीं आईं। Chhattisgarh Janakpur Baghmara Cave Baba Lok Ram Story: बाघमाड़ा गुफा उन्हें पसंद आई। गुफा की सफाई करवाने के बाद बाबा यहीं रह रहे हैं। बाबा जी करीब 18 साल से गुफा के अंदर ध्यान कर रहे हैं। वे गुफा के 500 मीटर अंदर ध्यान करते हैं। गुफा में 2 से 3 हजार लोग रह सकते हैं गुफा इतनी बड़ी है कि इसमें 2 से 3 हजार लोग रह सकते हैं। गुफा के अंदर बड़ी संख्या में बड़े-बड़े सांप, बिच्छू और मॉनिटर छिपकली रहते हैं। हालांकि, अभी तक किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। बाबा जी किसी से कुछ नहीं मांगते। जंगल में जो मिल जाता है, खा लेते हैं। यहां आने वाले लोगों की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।: आध्यात्मिक खोज के लिए बाबा की तपस्या Chhattisgarh Janakpur Baghmara Cave Baba Lok Ram Story: बाबा कहते हैं कि जिस तरह प्राचीन ऋषि-मुनि ईश्वर और अध्यात्म की खोज के लिए तपस्या करते थे, उसी तरह वे भी आध्यात्मिक खोज के लिए तपस्या कर रहे हैं। Chhattisgarh Janakpur Baghmara Cave Baba Lok Ram Story: बाबा लोक राम कहते हैं कि इस क्षेत्र के बुजुर्गों के अनुसार इस गुफा में बड़ी संख्या में बाघ रहा करते थे, जिसके कारण इसका नाम बाघ मादा पड़ा। बाबा कहते हैं कि अब बाघ तो नहीं आते, लेकिन भालू अक्सर दिखाई देते हैं। बाबा लोक राम ने बताया कि करीब 17 से 18 साल पहले जब गुफा की सफाई की गई थी, तो बड़ी संख्या में हड्डियां मिली थीं, लेकिन यह पता नहीं चल सका था कि वे हड्डियां बाघ की थीं या किसी अन्य जानवर की। जड़ी-बूटियों का खजाना है बाघ मादा का यह क्षेत्र Chhattisgarh Janakpur Baghmara Cave Baba Lok Ram Story: यह गुफा न केवल बाबा की तपस्या का केंद्र है, बल्कि यहां की पहाड़ियों में औषधीय गुणों से भरपूर जड़ी-बूटियां भी पाई जाती हैं। यहां के लोगों का मानना ​​है कि एक पत्ता चबाने से व्यक्ति 24 घंटे बिना भोजन और पानी के रह सकता है। इन औषधियों के प्रभाव को देखकर लोग इस स्थान को आयुर्वेद का भण्डार कहने लगे हैं। जंगली जानवरों से खतरे के बावजूद गुफा में बैठे बाबा की तपस्या रहस्यमयी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां के लोगों का मानना ​​है कि एक पत्ता चबाने से व्यक्ति 24 घंटे बिना भोजन और पानी के जीवित रह सकता है। भरतपुर में कई छिपे हुए पर्यटन स्थल Chhattisgarh Janakpur Baghmara Cave Baba Lok Ram Story: बाघमाड़ा गुफा के अलावा भरतपुर में कई ऐसे स्थान हैं जिनका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है। अगर इन्हें पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा दिया जाए तो यहां के स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं। Chhattisgarh Janakpur Baghmara Cave Baba Lok Ram Story: सरकार के प्रयासों से यह क्षेत्र न केवल पर्यटन स्थल के रूप में उभर सकता है, बल्कि यहां के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी ला सकता है। Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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