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: दक्षिण की सीट किस मंत्र से जीती BJP ? कांग्रेस की करारी हार के बड़े फैक्टर, टुकड़ों में बंट गई कांग्रेस, जानिए कहां हुई सियासी चूक ?

MP CG Times / Sun, Nov 24, 2024

BJP wins Raipur South seat and Congress loses: रायपुर दक्षिण सीट पर कमल का जलवा बरकरार रहा। सुनील सोनी ने एकतरफा मुकाबले में कांग्रेस के आकाश शर्मा को हराया। आंकड़ों के मुताबिक जितने वोटों से भाजपा प्रत्याशी जीते, उतने ही वोट कांग्रेस को मिले।

BJP wins Raipur South seat and Congress loses: भाजपा का यह किला एक बार फिर पार्टी के लिए अभेद्य किला बन गया। नतीजों के बाद भाजपा की जीत और कांग्रेस की हार को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। "बृजमोहन अग्रवाल ही लड़ रहे हैं चुनाव" चुनाव से ठीक पहले बृजमोहन अग्रवाल ने कहा था कि इस सीट पर सिर्फ बृजमोहन अग्रवाल ही चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में भाजपा के सुनील सोनी आकाश शर्मा के खिलाफ नहीं दिखे, बल्कि बृजमोहन अग्रवाल खुद कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ मतदाताओं ने खड़े नजर आए। BJP wins Raipur South seat and Congress loses: उपचुनाव में कांग्रेस की ओर से जो चुनौती दिख रही थी, वह नतीजों में पूरी तरह खत्म हो गई। चुनाव में बृजमोहन अग्रवाल का दबदबा साफ तौर पर देखने को मिला। भाजपा का चुनाव प्रबंधन रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट के लिए भाजपा ने चार मंडल बनाए। हर मंडल का प्रभारी एक मंत्री को बनाया गया। चारों मंडलों का अध्यक्ष एक पूर्व मंत्री और संगठन के एक पदाधिकारी को बनाया गया। हर वार्ड का प्रभारी एक विधायक या पूर्व विधायक को बनाया गया। इन विधायकों को वार्ड के सभी पन्ना प्रभारियों की जिम्मेदारी दी गई। मतदाता सूची में शामिल हर 30 मतदाताओं पर एक कार्यकर्ता को प्रभारी बनाया गया। प्रभारी का काम हर दिन हर 30 मतदाताओं से मिलकर उनसे बात करना था। कैसा रहा कांग्रेस का चुनाव प्रबंधन रायपुर दक्षिण विधानसभा में कांग्रेस ने 64 प्रभारी बनाए। प्रभारियों में विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, महापौर, अध्यक्ष, पूर्व महापौर, अध्यक्ष स्तर के नेता शामिल थे। प्रभारी के अधीन 64 सह प्रभारी बनाए गए। इसमें महासचिव, उपाध्यक्ष, सचिव, पार्षद जैसे संगठन पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई। प्रभारी और सह प्रभारी के अधीन हर बूथ पर एक कार्यकर्ता को समन्वयक बनाया गया। समन्वयक के जिम्मे घर-घर जाकर लोगों से बात करना और कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करना था। रायपुर दक्षिण विधानसभा का वार्ड समीकरण BJP wins Raipur South seat and Congress loses: रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट में कुल 19 वार्ड हैं। इन 19 वार्डों में से 9 वार्डों में कांग्रेस के पार्षद हैं, दो वार्ड ऐसे हैं जहां निर्दलीय पार्षद जीते हैं लेकिन वे सभी कांग्रेस समर्थक हैं। आठ वार्डों में भाजपा के वार्ड पार्षद हैं। ऐसे में कांग्रेस यह मानकर चल रही थी कि इन वार्डों में कांग्रेस मजबूत है। भाजपा के विरोध का लाभ कांग्रेस को मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस के सारे राजनीतिक समीकरण गलत साबित हुए। इस सीट पर कमल ने अपना कब्जा बरकरार रखा। वरिष्ठ पत्रकार की जीत और हार पर राय वरिष्ठ पत्रकार अनिरुद्ध दुबे का मानना ​​है कि रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट पर जीत के एक नहीं बल्कि कई कारण हैं। वरिष्ठ पत्रकार अनिरुद्ध दुबे ने जीत और हार के कारण गिनाए हैं। भाजपा की जीत के कारण रायपुर दक्षिण सीट भाजपा का अभेद्य किला बन गई है। इसके पीछे बृजमोहन अग्रवाल को वजह माना जा रहा है। वे इतने लंबे समय से लगातार इस सीट पर जीतते आ रहे हैं। BJP wins Raipur South seat and Congress loses: रायपुर दक्षिण विधानसभा सीट बनने के बाद से आज तक यह सीट भाजपा के कब्जे में है। भाजपा यहां सबसे बड़ा वोट बैंक बन गई है। BJP wins Raipur South seat and Congress loses: शहरी इलाकों में भाजपा मजबूत है। भाजपा प्रत्याशी रायपुर के सांसद रह चुके हैं। लोगों के बीच उनका अच्छा खासा प्रभाव है। जब वे लोकसभा चुनाव जीते थे, तब भी उन्हें रायपुर दक्षिण से 89153 वोट मिले थे। जबकि विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा 67,719 वोटों से जीती थी। भाजपा का बूथ मैनेजमेंट काफी अच्छा रहा है। BJP wins Raipur South seat and Congress loses: रायपुर दक्षिण के लिए पूरी भाजपा ने मजबूती से लड़ाई लड़ी। संगठन का समर्थन भी काफी मजबूत रहा है। कांग्रेस की हार के कारण कांग्रेस प्रत्याशी पहचान के संकट से जूझते रहे, प्रत्याशी का चयन भी हार का बड़ा कारण बना। कांग्रेस संगठन और उसका वोट मैनेजमेंट ठीक न होना हार का बड़ा कारण बना। कांग्रेस ने जिस प्रत्याशी को चुना, जिस समर्थन की बात की जा रही थी, वह जमीन पर नजर नहीं आया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जिस तरह समर्पित भाव से काम करना था, वह भाजपा के मुकाबले कमजोर था। कांग्रेस से कहां चूक हुई कांग्रेस प्रत्याशी के बारे में वरिष्ठ पत्रकार इच्छित शर्मा ने कहा कि यहां प्रत्याशी का चयन एक बड़ा कारण रहा। भाजपा ने कांग्रेस द्वारा चुने गए प्रत्याशी से बड़ा चेहरा मैदान में उतारा। कांग्रेस की हार का दूसरा बड़ा कारण संगठन का अलग-अलग खेमों में बंट जाना रहा। BJP wins Raipur South seat and Congress loses: आरक्षित सीट पर भाजपा ने उतनी मजबूती से चुनाव नहीं लड़ा, जितनी उसे लड़ना चाहिए था। कांग्रेस के आकाश शर्मा सुनील सोनी की वरिष्ठता के आगे टिक नहीं पाए। यह फैक्टर भी हार का बड़ा कारण रहा। Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS  

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