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: Chhattisgarh: 'सोने से भी ज्यादा कीमती है ये माला';  सीएम भूपेश बोले- छत्तीसगढ़ के अलावा कहीं और नहीं मिलेगी

News Desk / Sun, Feb 26, 2023


मीडिया से चर्चा करते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

मीडिया से चर्चा करते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

रायपुर में तीन दिन तक चले कांग्रेस का 85वां राष्ट्रीय महाधिवेशन खत्म हो गया है। इसके बाद भी अधिवेशन में स्वागत को लेकर प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। सीएम भूपेश की ओर से अतिथियों को माला पहनाकर स्वागत करने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। भाजपा के तथाकथित फेसबुक पेज और सोशस मीडिया ग्रुप्स में दावा किया जा रहा है कि ये माला सोने की है। वायरल वीडियो 24 फरवरी का बताया जा रहा है। बीजेपी की ओर से इस मामले में घेरने पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। 

सीएम भूपेश ने एयरपोर्ट पर चर्चा में कहा कि बीजेपी की आईटी सेल इस मामले में अफवाह फैला रही है। वो गणेश जी को देशभर में दूध पिला देती है। वो इसमें माहिर हैं। ये हमारे बैगा जनजाति की ओर से माला बनाई जाती है। ये विशेष प्रकार की घास से, फूल के डंठल से वो लोग माला बनाते हैं। कम से कम बीजेपी वालों को रमन सिंह से पूछ लेना चाहिए। ये उन्हीं के जिले से बनती है। 

मंत्री अकबर ने मंगवाई थी माला
उन्होंने कहा कि मैंने अकबर से कहा था कि सूत की माला से, फूल की माला से तो हम स्वागत करते ही हैं, लेकिन क्रिएटिव टाइप से जो माला बनाते हैं, वो हम मंगवा सकते हैं क्या?... फिर उन्होंने दर्जनों माला मंगवाया। फिर उसी माला से सभी नेताओं का स्वागत किया गया। सोने से भी ज्यादा कीमती है। ये छत्तीसगढ़ के अलावा कहीं और नहीं मिलेगी। बीजेपी को आरएसएस में भर्ती करवा देना शुरू कर देना चाहिए। बीजेपी को राहुल गांधी के बारे में जितना अफवाह फैलाना था , वो फैला चुके। अब इससे कुछ नहीं फर्क पड़ने वाला। 


 
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हां, सोने की माला पहनाई है: सुशील आनंद 
वहीं छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संचार विभाग के चेयरमैन सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि हां सीएम भूपेश ने अपने अतिथियों को सोने की माला पहनाई है। वो सोने की माला जो छत्तीसगढ़ के माटीपुत्रों ने अपने हाथों से बनाई है। वह माला जो छत्तीसगढ़ के स्वर्णभूमि की घास से उपजी है। बीजेपी के लोग इतने ज्यादा नीचे गिर जाएंगे, ये मालूम नहीं था। सीएम ने छत्तीसगढ़ी संस्कृति का प्रचार किया है। 15 साल तक छत्तीसगढ़ियावाद का दमन करने वाली बीजपी अपनी विकृति मानसिकता का परिचय दिया है।
 
मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार ने बताई सच्चाई
वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मीडिया सलाहकार व कांग्रेस नेता रुचिर गर्ग ने भी माले के पीछे की सच्चाई बयां की। उन्होंने फेसबुक पर लिखा कि हां ये हार सोने के हैं , उससे भी अनमोल हैं ! अफवाहबाज आई टी सेल से पता चला कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांग्रेस महाधिवेशन में आए अतिथियों का स्वागत सोने के हार से किया।
एक बार को तो यकीन ही नहीं हुआ ! लेकिन वीडियो देखने पर तो साफ था कि हार सोने का था,और छोटा मोटा नहीं बड़ा हार था।  हर एक अतिथि के लिए एक हार था। फिर भी मन हुआ कि थोड़ी और पुष्टि कर लें क्योंकि ज़माना तो अफवाहबाजों का है । मैंने भौतिक सत्यापन किया तो पाया कि हार तो वाकई सोने का था और वो भी कवर्धा की माटी के सुनारों द्वारा निर्मित! अतिथि भी उस हार को पा कर गदगद थे। महाधिवेशन का सबसे कीमती तोहफा जो था। सब सहेज कर ले गए। इस अनमोल तोहफे को कवर्धा के प्रकृति पुत्रों / पुत्रियों ने बनाया था। 
करीब दो सौ की संख्या में ये बेशकीमती हार आए थे।  अतिथि भी महत्वपूर्ण थे।वो ऐसे कीमती तोहफों की कद्र करना जानते थे और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी ऐसे अनमोल तोहफे देना सुखद लगता है! दरअसल, ये हार सोने के नहीं बल्कि सोने से भी कीमती होते हैं । इन्हें परंपरागत रूप से माटी के वो सुनार बनाते हैं जिन्हें हम बैगा के नाम से जानते हैं।  बैगाओं के नेता इतवारी बैगा बताते हैं कि इसमें सूताखर नाम की घास और मुआ के फूल की डंडी का प्रयोग होता है और एक एक हार हाथ से बहुत मेहनत से बनाया जाता है।

'इस हार को बीरन कहते हैं'
आम छत्तीसगढ़िया तो इस हार की कीमत ,बनाने में लगने वाली मेहनत ,इसे बनाने वाले माटी के सुनारों से परिचित था पर आई टी सेल को भी अब इसकी कीमत पता चल गई है। दरअसल अब इस राज्य में गोबर , गौ मूत्र भी कीमती हो गया है और ठेठरी खुरमी जैसे माटी के व्यंजन भी। बैगा आदिवासी घास फूस से बड़ी मेहनत से जिस माला को बनाते हैं उसे आई टी सेल ने सोने की माला बना दी ! अफवाह भी फैला दी।हार की चमक देखते ही सोशल मीडिया पर आईटी सेल सक्रिय हो गया। अच्छा ये हुआ कि इस बहाने बैगाओं की मेहनत की चमक सोशल मीडिया पर छा गई।  

'हां ये चमक सोने सी है'
हां इस चमक में सोने से कीमती पसीना है, हां ये चमक प्रकृति के,हमारी मिट्टी के उन सुनारों की कला की है जिन्हें हम बैगा कहते हैं। हां ये बेशकीमती है,सोना है,सोने से महंगा है!  इसे सोशल मीडिया पर और फैलाना चाहिए! सोना कह कर ही फैलाना चाहिए! माटी के शिल्प को कम से कम इस बहाने सभ्रांत लोगों के मंच पर जगह मिल जाएगी ! 


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