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गरियाबंद में खाद माफिया का नेटवर्क एक्टिवेट : रात के अंधेरे में DAP की सप्लाई, कालाबाजारी कर किसानों को लूटने की साजिश ?

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में उस समय खाद माफिया के नेटवर्क पर बड़ा झटका लगा, जब देवभोग पुलिस ने रात के अंधेरे में अवैध रूप से परिवहन की जा रही डीएपी खाद की बड़ी खेप पकड़ ली।

पुलिस ने 280 बोरी डीएपी खाद से भरे एक मेटाडोर को जब्त किया है, जिसकी कीमत करीब 3 लाख 50 हजार रुपए बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में मामला सिर्फ अवैध परिवहन का नहीं, बल्कि किसानों की जरूरतों का फायदा उठाकर मुनाफाखोरी और कालाबाजारी के संगठित खेल का भी सामने आ रहा है।

किसानों के लिए संकट, मुनाफाखोरों के लिए कमाई का मौका

प्रदेश में खरीफ सीजन शुरू होते ही किसान खेतों में उतर चुके हैं। मक्का, धान और अन्य फसलों की बुवाई के लिए डीएपी खाद की मांग तेजी से बढ़ी है। इसी बीच खाद की कमी और आपूर्ति में आई बाधाओं का फायदा उठाकर कुछ व्यापारी किसानों की मजबूरी को कमाई का जरिया बना रहे हैं।

जहां किसान खाद की एक-एक बोरी के लिए सहकारी समितियों और दुकानों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर खाद की बड़ी खेपें नियमों को दरकिनार कर गुपचुप तरीके से दूसरे इलाकों में भेजी जा रही हैं।

रात के अंधेरे में पकड़ा गया मेटाडोर

जानकारी के मुताबिक, देवभोग पुलिस रात्रि गश्त पर थी। इसी दौरान संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर एक मेटाडोर को रोका गया। जांच में वाहन के भीतर 280 बोरी डीएपी खाद मिली। चालक से दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह वैध परिवहन से जुड़े संतोषजनक कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने पूरा माल जब्त कर लिया।

चालक का खुलासा, लाइसेंसी व्यापारी का नाम आया सामने

पूछताछ में चालक ने बताया कि उसे 8 हजार रुपए किराए पर वाहन चलाने के लिए रखा गया था। उसके मुताबिक, उरमाल के एक लाइसेंसी व्यापारी के कहने पर खाद को ओडिशा के सीनापाली क्षेत्र से जांगड़ा ले जाया जा रहा था।

वहां यह खेप एक मक्का कारोबारी को पहुंचाई जानी थी। इस खुलासे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर लाइसेंसधारी व्यापारी की आड़ में खाद का यह कारोबार किस स्तर तक फैला हुआ है।

खाद संकट के बीच सक्रिय हुए कालाबाजारी गिरोह

जानकारों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण रासायनिक खाद के उत्पादन और आपूर्ति पर असर पड़ा है। सरकारी सप्लाई भी अपेक्षाकृत कम हुई है।

ऐसे समय में किसानों तक खाद पहुंचाने की बजाय कुछ कारोबारी कृत्रिम संकट पैदा कर अधिक दाम वसूलने की कोशिश कर रहे हैं। आरोप है कि खाद को एक जगह से दूसरी जगह भेजकर ऊंचे दामों पर बेचने और जमाखोरी के जरिए अतिरिक्त मुनाफा कमाने का खेल चल रहा है।

किसानों का सवाल- जब खाद नहीं है तो ट्रकों में कहां से आ रही है?

ग्रामीण क्षेत्रों में किसान लंबे समय से खाद की कमी की शिकायत कर रहे हैं। कई जगह समितियों में पर्याप्त स्टॉक नहीं होने की बात कही जा रही है। ऐसे में 280 बोरी डीएपी खाद की अवैध खेप पकड़े जाने के बाद किसानों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि खाद की कमी है तो इतनी बड़ी मात्रा में खाद आखिर निजी नेटवर्क के जरिए कहां और किसके लिए भेजी जा रही थी?

कृषि विभाग को सौंपी गई जांच

पुलिस ने जब्त खाद और वाहन को आगे की जांच एवं कार्रवाई के लिए कृषि विभाग के सुपुर्द कर दिया है। अब यह जांच का विषय है कि खाद की खरीद, परिवहन और बिक्री में किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या यह मामला सिर्फ अवैध परिवहन तक सीमित है या फिर इसके पीछे कालाबाजारी और मुनाफाखोरी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है।

सबसे बड़ा सवाल

जब किसान खाद के लिए परेशान हैं, तब क्या कुछ लोग उनकी मजबूरी पर मुनाफे की फसल काट रहे हैं? देवभोग में हुई यह कार्रवाई सिर्फ एक वाहन पकड़ने की घटना नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर बड़ा सवाल है जहां खेती के सबसे जरूरी संसाधन को भी मुनाफाखोरी का जरिया बना दिया जाता है। अब निगाहें कृषि विभाग और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

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