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क्या गरियाबंद की जनता से धोखा हुआ ? : 14KM दूर से गुजर रही ट्रेन, पटरी का इंतजार कर रहा देवभोग, जानिए सांसद पर क्यों भड़के लोग ?

MP CG Times / Sun, Jun 21, 2026

ओडिशा की सीमा से सटा गरियाबंद जिले का देवभोग क्षेत्र एक बार फिर रेल कनेक्टिविटी को लेकर चर्चा में है। विडंबना यह है कि देवभोग से महज 14 किलोमीटर दूर ओडिशा के धर्मगढ़ तक रेल सेवा पहुंच चुकी है और कालाहांडी, नुआपाड़ा तथा नवरंगपुर जैसे जिलों में लगातार रेल परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है, लेकिन गरियाबंद और देवभोग क्षेत्र आज भी रेल सुविधा से वंचित हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और पहल की कमी के कारण यह इलाका विकास की इस महत्वपूर्ण सुविधा से दूर रह गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाने देवभोग पहुंचीं महासमुंद लोकसभा क्षेत्र की सांसद रूपकुमारी चौधरी के सामने शुक्रवार को स्थानीय नागरिकों ने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया। नगर पंचायत उपाध्यक्ष सुशील यादव के नेतृत्व में नागरिकों ने सांसद को ज्ञापन सौंपते हुए देवभोग क्षेत्र को धर्मगढ़ रेल लाइन से जोड़ने और लंबे समय से लंबित रेल परियोजना को आगे बढ़ाने की मांग की।

सांसद के सामने उठी रेल लाइन विस्तार की मांग

स्थानीय लोगों ने सांसद को बताया कि ओडिशा के जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्रों में रेल नेटवर्क विस्तार के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि कालाहांडी, नुआपाड़ा और नवरंगपुर जिलों में नई रेल परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ रहा है। उनका कहना था कि अगले पांच वर्षों में इन जिलों में रेल नेटवर्क और मजबूत होने की संभावना है, जबकि देवभोग क्षेत्र अब भी प्रतीक्षा कर रहा है।

नागरिकों ने कहा कि देवभोग से केवल 14 किलोमीटर दूर धर्मगढ़ तक रेल लाइन पहुंच चुकी है। यदि इस लाइन का विस्तार किया जाए तो गरियाबंद जिले के हजारों लोगों को सीधा लाभ मिल सकता है।

सांसद बोलीं- पहले किसी ने मांग नहीं रखी थी

रेल विस्तार को लेकर सवाल पूछे जाने पर सांसद रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि अब तक उनके सामने क्षेत्र से इस प्रकार की कोई औपचारिक मांग नहीं आई थी। अब आवेदन प्राप्त हुआ है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में रेल सेवाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। देवभोग क्षेत्र की मांग को रेल मंत्री के समक्ष रखा जाएगा और भविष्य में इस दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी।

ओडिशा के राज्यसभा सांसद ने खुद उठाया था मुद्दा

रेल परियोजना को लेकर ओडिशा की सक्रियता का उदाहरण भी सामने आया है। ओडिशा के राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार ने 8 मई को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर रेल विस्तार से जुड़ी चार प्रमुख मांगें रखी थीं।

इन मांगों में राजिम से धर्मगढ़ तक नई सिंगल रेल लाइन बिछाने का प्रस्ताव भी शामिल था। प्रस्तावित रेल लाइन गरियाबंद और देवभोग क्षेत्र से होते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-130 के आसपास के क्षेत्र को जोड़ सकती है। मांग पत्र में एनएच-26 बल्दियामाल क्षेत्र को एनएच-30 अभनपुर से जोड़ने की संभावनाओं का भी उल्लेख किया गया था।

ओडिशा सांसद की इस पहल का देवभोग क्षेत्रीय समाधान मंच ने स्वागत किया है।

'जनप्रतिनिधियों को आवेदन का इंतजार क्यों था?'

देवभोग क्षेत्रीय समाधान मंच के प्रमुख कन्हैया मांझी ने कहा कि यह आश्चर्य की बात है कि जिस मांग को क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को स्वयं केंद्र सरकार के सामने उठाना चाहिए था, उसके लिए आवेदन का इंतजार किया गया।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सक्रिय सामाजिक संगठनों, स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न दौरों के दौरान सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों के सामने अनेक समस्याएं रखीं, लेकिन अधिकांश मांगों पर ठोस पहल दिखाई नहीं दी।

कन्हैया मांझी के अनुसार क्षेत्र में अस्पताल भवन की आवश्यकता, चिकित्सकों की कमी, बेलाट नाला पर पुल निर्माण, शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी अनेक मांगें वर्षों से लंबित हैं।

15 साल पुरानी है रेल लाइन की मांग

देवभोग और गरियाबंद क्षेत्र को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग नई नहीं है। यह मुद्दा करीब डेढ़ दशक से उठता रहा है।

पूर्व सांसद चंदूलाल साहू और चुन्नीलाल साहू भी अपने कार्यकाल में इस मांग को केंद्र सरकार के समक्ष उठा चुके हैं। संसद में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी।

वर्ष 2012 में इस प्रस्तावित रेल लाइन के लिए सर्वेक्षण भी कराया गया था। हालांकि बाद में संभावित आय कम होने और उदंती-सीतानदी अभयारण्य क्षेत्र से जुड़े पर्यावरणीय कारणों का हवाला देकर परियोजना की फाइल बंद कर दी गई थी।

क्या अब खुल सकता है बंद पड़ा रास्ता?

रेल परियोजना के जानकार और भवानीपटना के अधिवक्ता एस.के. राउत का मानना है कि परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं और इस परियोजना को नए सिरे से मंजूरी मिल सकती है।

उन्होंने बताया कि बिलासपुर-खड़गपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-49 के फोरलेन प्रोजेक्ट को सिमलीपाल टाइगर रिजर्व क्षेत्र से विशेष सुरक्षा मानकों और संरचनात्मक शर्तों के साथ मंजूरी मिली है। इसी तरह उदंती-सीतानदी अभयारण्य क्षेत्र में भी आवश्यक सुरक्षा उपायों के साथ रेल परियोजना को अनुमति मिल सकती है।

पहले सर्वे में बताई गई थी ज्यादा दूरी

एस.के. राउत के अनुसार पहले हुए सर्वे में प्रस्तावित रेल लाइन की लंबाई लगभग 230 किलोमीटर बताई गई थी, जबकि तकनीकी रूप से इसे करीब 185.5 किलोमीटर में भी पूरा किया जा सकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि नई सर्वे प्रक्रिया में रेल लाइन को घने जंगलों के बजाय अधिक आबादी वाले क्षेत्रों से गुजारा जाए। ओडिशा के रिहायशी इलाकों से होकर गुजरने वाली लाइन आर्थिक दृष्टि से भी अधिक व्यवहारिक हो सकती है और यात्रियों की संख्या बढ़ने से परियोजना की आय भी बेहतर होगी।

अब जनप्रतिनिधियों की पहल पर टिकी उम्मीद

देवभोग और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की उम्मीदें अब जनप्रतिनिधियों और केंद्र सरकार की आगामी पहल पर टिकी हैं। ओडिशा की ओर से लगातार उठ रही मांगों के बीच स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि गरियाबंद और देवभोग क्षेत्र के निर्वाचित प्रतिनिधि भी गंभीर प्रयास करें तो वर्षों से लंबित राजिम-धर्मगढ़ रेल लाइन परियोजना फिर से पटरी पर लौट सकती है।

फिलहाल देवभोग के लोगों का सवाल यही है कि जब रेल लाइन उनके घर से महज 14 किलोमीटर दूर पहुंच चुकी है, तो फिर उनके हिस्से में इंतजार ही क्यों है।

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