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: बच्चों के लिए सड़क पर परिजन: एकलव्य स्कूल में सुरक्षा-व्यवस्था के लिए खोला मोर्चा, कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठे

News Desk / Tue, Jan 31, 2023


छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर परिजनों ने मोर्चा खोल दिया है। बच्चों के अभिभावक बुधवार को कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठ गए हैं। इससे पहले परिजन अपने बच्चों को स्कूल से घर ले गए थे। उन्होंने व्यवस्था सुधरने के बाद भेजने की बात कही थी, लेकिन कोई बदलाव नहीं होता देख अब सड़क पर उतर आए हैं। अभिभावकों का कहना है कि यह उनके बच्चों के भविष्य के लिए है। 

यह भी पढ़ें...'एकलव्य स्कूल में अराजक तत्वों का जमावड़ा': परिजनों ने दिया धरना, बोले- बच्चों की सुरक्षा खतरे में, घर ले गए

स्कूल में अराजक तत्वों के जमावड़े का आरोप
दरअसल, पेंड्री स्थित शासकीय आवासीय स्कूल के परिसर में सुरक्षा को लेकर हंगामा है। अभिभावक इससे पहले 29 जनवरी को अपने बच्चों को स्कूल से ले गए थे। उन्होंने व्यवस्था सुधारने के लिए 31 जनवरी तक का समय दिया था। इसके बाद आंदोलन की चेतावनी दी थी। आरोप है कि स्कूल में अराजक तत्वों का जमावड़ा लग रहा है। अभिभावाकों के इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति शासकीय विकास संघ ने भी अपना समर्थन दिया है। 

परिजन बोले- बच्चों की सुरक्षा खतरे में
पहले भी स्कूल के बाहर प्रदर्शन कर रहे परिजन ने कहा था कि उनके बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। यहां पर अव्यवस्था का आलम है। बच्चों को कोई सुविधा भी नहीं मिल रही। इसको लेकर कई बार प्रशासन से शिकायत की गई, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। आरोप लगाया कि स्कूल में अराजक तत्वों का प्रवेश हो गया है। बच्चियों के छात्रावास में आसामाजिक तत्व थे। इसे लेकर पत्राचार के माध्यम से शासन-प्रशासन को अवगत कराया गया, पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

स्कूल में 418 बालक-बालिकाएं पढ़ते हैं
एकलव्य स्कूल छठवीं से 12वीं कक्षा तक संचालित है। यहां 418 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। पालक संघ के अध्यक्ष रमेश हिड़ामे ने बताया कि हमने 24 जनवरी को प्रेस वार्ता लेकर स्कूल में हो रहे अव्यवस्था और असुरक्षा को सुधारने की बात कही थी, लेकिन कुछ नहीं होने पर बच्चों को लेकर घर चले गए। इसके बाद 31 जनवरी तक सुधार लाने की बात कही थी, फिर भी प्रशासन में इस संबंध में कोई भी कार्यवाही नहीं की है, जिसकी वजह से आज हम यहां धरना दे रहे हैं।


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