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: 'मन की पीड़ाओं का कोई अंत नहीं': सोशल मीडिया पर छलका संजय नेताम का दर्द, कहा- बड़े नेताओं के सामने मेरी नकारात्मक छवि प्रस्तुत की

MP CG Times / Fri, Oct 27, 2023

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद कांग्रेस में टिकट कटने से नेताओं का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बगावत तो देखने को नहीं मिल रहा है, लेकिन नेता सोशल मीडिया को हथियार बनाकर अपनी पीड़ा जाहिर कर रहे हैं। इसी कड़ी में बिंद्रानवागढ़ से दावेदारी कर रहे संजय नेताम ने अपनी पीड़ा सोशल मीडिया पर जाहिर की है। उन्होंने लिखा कि मन की पीड़ाओं का कोई अंत नहीं है, मन की पीड़ाएं अनंत हैं, स्तब्ध हैं, मौन हैं। उन्होंने लिखा कि बड़े नेताओं के सामने मेरी नकारात्मक छवि प्रस्तुत की गई।

संजय नेताम ने आगे लिखा कि अत्यधिक मौन होना भी कभी कभी आत्मसम्मान एवं स्वाभिमान के लिए नुकसानदेह हो जाता है और आत्मानुभूति होती है कि हमें उस स्थान पर अवश्य बोलना चाहिए था। जहां हम मौन साधकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं। आज कुछ ऐसा ही वातावरण मेरे अपनों के द्वारा मेरे लिए तैयार किया गया, इसलिए मुझे यहाँ बोलना आवश्यक हो गया है, क्योंकि वास्तविक परिस्थितियों को प्रकट करना भी आवश्यक है। मेरी दावेदारी कमजोर की गई नेताम ने लिखा कि बिंद्रानावगढ़ विधानसभा क्षेत्र की पार्टी गतिविधियों में बाहरी व्यक्तियों के बढ़ते हस्ताक्षेप ने पार्टी को रसातल पर पहुंचाने का षड्यंत्रपूर्वक प्रयास तो किया। साथ मैं व्यक्तिगत रूप से मेरे राजनीतिक क्रियाकलापों पर भी ओछी टिप्पणी करके मेरी व्यक्तिगत छवि को धूमिल करने का प्रयास शीर्ष नेतृत्व के समक्ष किया गया, ताकि बिंद्रानवागढ़ विधानसभा क्षेत्र से मेरी दावेदारी कमजोर हो और विरोधियों के निजी स्वार्थ की सिद्धि हो सके। बड़े नेताओं के सामने मेरी नकारात्मक छवि प्रस्तुत की उन्होंने लिखा कि मेरी छवि को धूमिल करने हमारे अपने ही लोगों ने गलत प्रस्तुतीकरण किया। इससे आज मैं अत्यधिक आहत हूं। हम चुनाव में उतरने और पार्टी का उम्मीदवार बनने सकारात्मक प्रयास तो करते ही हैं, लेकिन जिस प्रकार विरोधियों ने कुंठाभाव के साथ कुत्सित प्रयास किया और बड़े नेताओं के समक्ष मेरी नकारात्मक छवि प्रस्तुत करने की कोशिश की गई यह मेरे जीवन का सबसे ज्यादा आहत करने वाला है। मुझे विरोधी और अकर्मण्य सिद्ध करने में लगे थे मैंने हमेशा लोगों हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। शिक्षा, सड़क, पुल पुलिया, स्वास्थ्य,राशन कार्ड बनाने से लेकर सरकार की योजनाओं को जन जन तक पहुंचाने और कोविड के संक्रमणकाल में मैंने निस्वार्थ भाव से जनसेवा को सर्वोपरि माना, लेकिन अपने ही लोगों जो मुझे विरोधी और अकर्मण्य सिद्ध करने में लगे थे। Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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