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गरियाबंद के जंगलों में लौटती शांति : अतिक्रमण हटाने के बाद बदली उदंती सीता नदी अभ्यारण्य की तस्वीर, 143 फॉरेस्ट बीट में सख्त निगरानी व्यवस्था

MP CG Times / Mon, Apr 20, 2026

गिरीश जगत, गरियाबंद। उदंती सीता नदी अभ्यारण्य की कहानी अब सिर्फ एक संरक्षित वन क्षेत्र की नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसे मॉडल में बदलती दिख रही है, जहां संरक्षण, प्रबंधन और तकनीकी रणनीति ने मिलकर जंगल की दशा और दिशा दोनों बदल दी है। कभी अतिक्रमण, आग और मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियों से जूझता यह अभ्यारण्य अब शांत और संतुलित पारिस्थितिकी की ओर बढ़ चुका है।

वन विभाग की सक्रियता के बाद लगभग 700 हेक्टेयर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाया गया, जो इस क्षेत्र में लंबे समय से एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। अतिक्रमण हटने के बाद न सिर्फ जंगल ने अपनी जमीन वापस पाई, बल्कि वन्य प्राणियों के लिए सुरक्षित आवास का दायरा भी मजबूत हुआ।

143 फॉरेस्ट बीट में सख्त निगरानी व्यवस्था

गर्मी के मौसम में जंगलों में आग की घटनाएं आम होती हैं, लेकिन इस बार वन अमले ने पहले से ही तैयारी कर ली। अभ्यारण्य के 143 फॉरेस्ट बीट्स में फायर वॉचर और वाटर वॉचर की तैनाती की गई, जिससे न सिर्फ आग की घटनाओं पर नियंत्रण रखा गया बल्कि पानी की उपलब्धता और प्रबंधन भी बेहतर हुआ।

वन विभाग की यह व्यवस्था केवल निगरानी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे एक रियल-टाइम ग्राउंड मैनेजमेंट सिस्टम की तरह लागू किया गया, जिससे छोटी घटनाओं को भी बड़े नुकसान में बदलने से पहले ही रोक लिया गया।

मानव-वन्यजीव संघर्ष में बड़ी कमी

अभ्यारण्य के आसपास बसे करीब 120 गांवों में मानव और वन्यजीव संघर्ष की समस्या लंबे समय से चिंता का विषय रही थी, लेकिन अब स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बेहतर निगरानी, जल प्रबंधन और जंगल में मानवीय दखल कम होने के कारण अब वन्यजीव सुरक्षित दायरे में विचरण कर रहे हैं।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते तीन वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक भी गंभीर घटना दर्ज नहीं हुई है, जो इस पूरे मॉडल की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।

वन प्रबंधन का नया मॉडल बनता अभ्यारण्य

उपनिदेशक वरुण जैन और उनकी टीम द्वारा किए गए लगातार प्रयासों ने इस अभ्यारण्य को एक प्रयोगशाला की तरह बदल दिया है, जहां संरक्षण के नए मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। आग नियंत्रण, जल संरक्षण और अतिक्रमण मुक्त क्षेत्र की रणनीति ने मिलकर एक स्थायी इको-सिस्टम तैयार किया है।

वन अधिकारियों का मानना है कि यह मॉडल आने वाले समय में छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के अन्य संरक्षित क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।

उदंती सीता नदी अभ्यारण्य अब केवल एक वन क्षेत्र नहीं, बल्कि सफल वन प्रबंधन और संतुलित मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व का प्रतीक बनता जा रहा है। अतिक्रमण हटाने से लेकर आग नियंत्रण और पानी प्रबंधन तक हर कदम ने इस जंगल को फिर से जीवन दिया है।

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