अनूपपुर की सड़कों पर मवेशी बने 'यमदूत' : मवेशियों से टकराकर ढाई साल में 10 लोगों की मौत; 3.67 लाख गोवंश पर जिले में सिर्फ 16 गौशालाएं
MP CG Times / Mon, Sep 7, 2026
अनूपपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway), स्टेट हाईवे और शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों की प्रमुख सड़कें अब वाहन चालकों के लिए मौत का जाल बन चुकी हैं। सड़कों पर बेखौफ घूमते और झुंड बनाकर बैठे मवेशी लोगों की जान पर भारी पड़ रहे हैं।
प्रशासन के तमाम दावों और कागजी निर्देशों के बावजूद सड़कों पर रात-दिन मवेशियों का जमावड़ा बना रहता है, जिससे टकराकर बेकसूर लोग लगातार अपनी जान गंवा रहे हैं।

1. ढाई साल में 24 हादसे, 10 की मौत; 2026 में अब तक 96 ने गंवाई जान
सड़क सुरक्षा के आंकड़े के अनुसार, पिछले ढाई सालों में केवल सड़क पर बैठे आवारा पशुओं से टकराने के कारण 24 गंभीर दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और कई लोग जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो गए।
कुल 348 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 377 लोग घायल हुए और 155 लोगों की जान चली गई। केवल सात महीनों में ही 220 हादसे दर्ज हो चुके हैं, जिनमें 273 लोग घायल हुए और 96 लोगों की मौत हो चुकी है।
2. 3.67 लाख गायें, लेकिन गौशालाओं में जगह सिर्फ 2,118 की!
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में विशाल गोवंश मौजूद है, लेकिन उनके संरक्षण और सड़कों से हटाने के नाम पर व्यवस्था पूरी तरह सिफर (जीरो) नजर आती है:
विकासखंड | गायों की संख्या |
पुष्पराजगढ़ | 1,61,182 |
जैतहरी | 1,03,179 |
अनूपपुर | 57,714 |
कोतमा | 44,989 |
कुल योग | 3,67,064 गाय (इसके अलावा 67,675 भैंस व 89,659 बकरियां) |
जिले में वर्तमान में कुल 16 गौशालाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि इनमें कुल मिलाकर सिर्फ 2,118 गोवंश को ही रखा गया है। सबसे अधिक 226 पशु अंजनी स्थित प्रवर प्रज्ञा मंडल गौशाला में हैं। अधिकांश गौशालाओं में क्षमता महज 100 से 150 पशुओं की ही है।
यही वजह है कि ढोर-डंगर सड़कों पर रहने को मजबूर हैं और शाम ढलते ही हाईवे पर बैठ जाते हैं, जिससे सबसे ज्यादा शिकार दोपहिया वाहन चालक हो रहे हैं।
3. यातायात विभाग ने लिखा पत्र, नागरिकों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग
हादसों के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए जिला यातायात प्रभारी विनोद दुबे ने बताया कि सड़कों से मवेशी हटाने और संबंधित मवेशी मालिकों पर दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए ग्राम पंचायतों और नगर निकायों को पत्र लिखकर पत्राचार किया गया है।
नागरिकों की मांग
सड़कों पर घूम रहे निराश्रित मवेशियों को तत्काल कांजी हाउस और गौशालाओं में शिफ्ट किया जाए।
गौशालाओं की क्षमता बढ़ाई जाए।
खुले में मवेशी छोड़ने वाले पशुपालकों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और संबंधित नगरीय निकायों व पंचायतों की जवाबदेही तय की जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन