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: MP News: प्रदेश में पूरक पोषण आहार में बड़ा घोटाला, बाइक-कार-ऑटो के नंबर ट्रक के बताकर कागजों में बांटा राशन

News Desk / Sun, Sep 4, 2022


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महिला एवं बाल विकास विभाग ने 2018-21 के दौरान 2393 करोड़ का 4.05 मीट्रिक टेक होम राशन 1.35 करोड़ लाभार्थियों को बांटा। टेक होम राशन की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि इसके परिवहन, उत्पादन, वितरण और गुणवत्ता में गड़बड़ी की गई है। बच्चों और महिलाओं में पोषण की कमी दूर करने के उद्देश्य से पोषण आहार योजना के तहत बांटा जाने वाला टेक होम राशन बड़ी मात्रा में कागजों में बांट दिया गया।

मध्य प्रदेश ऑडिटर जनरल (एमपी एजी) की ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने बाइक, कार, ऑटो और टैंकर के नंबरों को ट्रक का बताकर 6 राशन बनाने वाली फर्मों से 6.94 करोड़ का 1125.64 मीट्रिक टन राशन परिवहन कर दिया। डाटाबेस मिलाने के कागजों पर लिखे गए नंबर बाइक, कार, ऑटो और टैंकर के निकले हैं।
 
बिना सर्वे के हितग्राही बनाए
विभाग ने स्कूल नहीं जाने वाली छात्राओं की संख्या का बिना बेसलाइन सर्वे कर ही राशन बांट दिया। हद तो यह है कि विभाग ने स्कूल शिक्षा विभाग के 9 हजार किशोरियों की संख्या को न मानते हुए बिना सर्वे के 36 लाख से ज्यादा संख्या मान ली। यही नहीं 2018- 21 के बीच 48 आंगनवाड़ियों में रजिस्टर किशोरियों की संख्या से ज्यादा को 111 करोड़ का राशन कागजों पर बांट दिया गया।  

बिना कच्चे माल के किया गया उत्पादन 
टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी मिली है। ऑडिट में सामने आया कि उत्पादन के लिए कच्चा माल, बिजली की खपत की तुलना में राशन का असंभव उत्पादन किया गया। इसमें 58 करोड़ का नकली उत्पादन किया गया। 

छह फर्मों में गड़बड़ी, कागज में सप्लाई
छह फर्मों बड़ी, धार, मंडला, रीवा, सागर और शिवपुरी में गड़बड़ी मिली है। यहां चालान जारी करने की तारीख पर टेक होम राशन के स्टॉक में अनुपलब्धता होने के बावजूद 4.95 करोड़ कीमत का 822 मीट्रिक टन टेक होम राशन सप्लाई कर दिया गया। 
 

गुणवत्ता जांच में भी बरती लापरवाही
टेक होम राशन के पोषण मूल्य का आकलन करने के लिए सैंपल की गुणवत्ता जांच में भी लापरवाही बरती गई है। सैंपल को संयंत्र, परियोजना और आंगनवाड़ी स्तर पर लेकर राज्य से बाहर स्वतंत्र प्रयोगशालाओं में भेजना था, लेकिन विभाग ने संयंत्र स्तर पर ही स्वतंत्र प्रयोगशालाओं में सैंपल भेजे। इसके अलावा 2237 करोड़ की लागत के 38,304 मीट्रिक टन टीएचआर में से निकाले गए नमूने स्वतंत्र प्रयोगशालाओं को भेजे गए, जो आवश्यक पोषण मूल्य के अनुरूप नहीं थे। इससे साफ होता है कि लाभार्थियों को खराब गुणवत्ता का टेक होम राशन मिला है।
 
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें
एमपी एजी ने अपनी रिपोर्ट में टेक होम राशन उत्पादन, परिवहन, वितरण और गुणवत्ता नियंत्रण में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी/ दुरुपयोग के मामले में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया कि सीडीपीओ, डीपीओ, प्लांट अधिकारी और परिवहन की व्यवस्था करने वाले अधिकारी, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस धोखाधड़ी में शामिल थे। बता दें महिला एवं बाल विकास विभाग इमरती देवी के उपचुनाव हारने के बाद से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पास ही है।

यह है डब्ल्यूसीडी की योजना
महिला एवं बाल विकास विभाग छह महीने से तीन साल की उम्र के बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं और 11 से 14 वर्ष के आयु वर्ग में स्कूल से बाहर की किशोरियों की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरक पोषण आहर के तहत टेक होम राशन (टीएचआर) बांटा रहा है।  

विस्तार

महिला एवं बाल विकास विभाग ने 2018-21 के दौरान 2393 करोड़ का 4.05 मीट्रिक टेक होम राशन 1.35 करोड़ लाभार्थियों को बांटा। टेक होम राशन की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया है कि इसके परिवहन, उत्पादन, वितरण और गुणवत्ता में गड़बड़ी की गई है। बच्चों और महिलाओं में पोषण की कमी दूर करने के उद्देश्य से पोषण आहार योजना के तहत बांटा जाने वाला टेक होम राशन बड़ी मात्रा में कागजों में बांट दिया गया।

मध्य प्रदेश ऑडिटर जनरल (एमपी एजी) की ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने बाइक, कार, ऑटो और टैंकर के नंबरों को ट्रक का बताकर 6 राशन बनाने वाली फर्मों से 6.94 करोड़ का 1125.64 मीट्रिक टन राशन परिवहन कर दिया। डाटाबेस मिलाने के कागजों पर लिखे गए नंबर बाइक, कार, ऑटो और टैंकर के निकले हैं।


 
बिना सर्वे के हितग्राही बनाए
विभाग ने स्कूल नहीं जाने वाली छात्राओं की संख्या का बिना बेसलाइन सर्वे कर ही राशन बांट दिया। हद तो यह है कि विभाग ने स्कूल शिक्षा विभाग के 9 हजार किशोरियों की संख्या को न मानते हुए बिना सर्वे के 36 लाख से ज्यादा संख्या मान ली। यही नहीं 2018- 21 के बीच 48 आंगनवाड़ियों में रजिस्टर किशोरियों की संख्या से ज्यादा को 111 करोड़ का राशन कागजों पर बांट दिया गया।  

बिना कच्चे माल के किया गया उत्पादन 
टेक होम राशन के उत्पादन और वितरण के रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी मिली है। ऑडिट में सामने आया कि उत्पादन के लिए कच्चा माल, बिजली की खपत की तुलना में राशन का असंभव उत्पादन किया गया। इसमें 58 करोड़ का नकली उत्पादन किया गया। 

छह फर्मों में गड़बड़ी, कागज में सप्लाई
छह फर्मों बड़ी, धार, मंडला, रीवा, सागर और शिवपुरी में गड़बड़ी मिली है। यहां चालान जारी करने की तारीख पर टेक होम राशन के स्टॉक में अनुपलब्धता होने के बावजूद 4.95 करोड़ कीमत का 822 मीट्रिक टन टेक होम राशन सप्लाई कर दिया गया। 

 

गुणवत्ता जांच में भी बरती लापरवाही
टेक होम राशन के पोषण मूल्य का आकलन करने के लिए सैंपल की गुणवत्ता जांच में भी लापरवाही बरती गई है। सैंपल को संयंत्र, परियोजना और आंगनवाड़ी स्तर पर लेकर राज्य से बाहर स्वतंत्र प्रयोगशालाओं में भेजना था, लेकिन विभाग ने संयंत्र स्तर पर ही स्वतंत्र प्रयोगशालाओं में सैंपल भेजे। इसके अलावा 2237 करोड़ की लागत के 38,304 मीट्रिक टन टीएचआर में से निकाले गए नमूने स्वतंत्र प्रयोगशालाओं को भेजे गए, जो आवश्यक पोषण मूल्य के अनुरूप नहीं थे। इससे साफ होता है कि लाभार्थियों को खराब गुणवत्ता का टेक होम राशन मिला है।
 
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें
एमपी एजी ने अपनी रिपोर्ट में टेक होम राशन उत्पादन, परिवहन, वितरण और गुणवत्ता नियंत्रण में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी/ दुरुपयोग के मामले में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया कि सीडीपीओ, डीपीओ, प्लांट अधिकारी और परिवहन की व्यवस्था करने वाले अधिकारी, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस धोखाधड़ी में शामिल थे। बता दें महिला एवं बाल विकास विभाग इमरती देवी के उपचुनाव हारने के बाद से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के पास ही है।

यह है डब्ल्यूसीडी की योजना
महिला एवं बाल विकास विभाग छह महीने से तीन साल की उम्र के बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं और 11 से 14 वर्ष के आयु वर्ग में स्कूल से बाहर की किशोरियों की पोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पूरक पोषण आहर के तहत टेक होम राशन (टीएचआर) बांटा रहा है।  


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