ईरान-अमेरिका जंग खतरनाक मोड़ पर : 45 दिन के सीजफायर पर टिकी दुनिया, अगले 48 घंटे आखिरी मौका, वरना बड़े हमले की तैयारी
MP CG Times / Mon, Apr 6, 2026
Iran-US war: मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां ईरान और अमेरिका के बीच 45 दिन के प्रस्तावित सीजफायर को लेकर निर्णायक बातचीत जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह डील शांति की आखिरी उम्मीद मानी जा रही है—अगर समझौता नहीं हुआ, तो सैन्य टकराव तेज हो सकता है। इजराइल भी इस पूरे घटनाक्रम में सक्रिय भूमिका में है।
48 घंटे का अल्टीमेटम, मध्यस्थ देशों की अहम भूमिका
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये इस डील को कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। बातचीत के पहले चरण में 45 दिन का अस्थायी सीजफायर लागू करने का प्रस्ताव है, जिसके दौरान स्थायी शांति समझौते पर चर्चा होगी। मध्यस्थों का कहना है कि अगले 48 घंटे इस समझौते के लिए बेहद अहम हैं।

हमले की तैयारी, ऊर्जा ठिकाने निशाने पर
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इजराइल ने ईरान के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर ठिकानों पर हमले की योजना तैयार कर ली है। हालांकि, ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक मुद्दों पर कोई बड़ी रियायत देने के मूड में नहीं है।
ईरान की चेतावनी: वैश्विक सप्लाई चेन पर असर
ईरान ने साफ कहा है कि यदि उस पर हमला हुआ, तो वह सिर्फ सैन्य जवाब ही नहीं देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई को भी प्रभावित कर सकता है। ईरानी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के अलावा बाब-अल-मंदेब जैसे अहम समुद्री रास्तों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोला गया, तो ईरान को “नरक जैसे हालात” का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने पावर प्लांट और पुलों पर हमले के संकेत भी दिए हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध की आशंका और बढ़ गई है।
रेड सी और हूती विद्रोही भी सक्रिय
इस बीच हूती विद्रोही भी रेड सी में जहाजों को निशाना बनाने की धमकी दे चुके हैं। इससे वैश्विक व्यापार मार्गों पर संकट गहराने की आशंका है। कुल मिलाकर, यह टकराव अब केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक असर वाला संकट बन चुका है।
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