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मोहन भागवत बोले-BJP को RSS कंट्रोल नहीं करता : संघ को इस चश्मे से देखना गलत, सत्ता नहीं समाज निर्माण हमारा लक्ष्य, पढ़िए 10 बड़ी बातें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर भोपाल में आयोजित ‘प्रमुख जन गोष्ठी’ में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने संघ की भूमिका, उद्देश्य और कार्यशैली को लेकर खुलकर विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS को भाजपा या विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नजरिए से देखना एक बड़ी गलतफहमी है।

संघ किसी को कंट्रोल नहीं करता

डॉ. भागवत ने कहा कि संघ, भाजपा या किसी अन्य संगठन को नियंत्रित नहीं करता। सभी संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। RSS का उद्देश्य सत्ता, टिकट या चुनाव जीतना नहीं, बल्कि समाज की गुणवत्ता, चरित्र निर्माण और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करना है।

RSS कोई पैरा मिलिट्री फोर्स नहीं

संघ की वर्दी, मार्च और लाठी अभ्यास को लेकर फैली भ्रांतियों पर उन्होंने कहा कि अगर कोई RSS को पैरा मिलिट्री फोर्स समझता है तो यह गलत धारणा है। ये गतिविधियां अनुशासन, स्वास्थ्य और संगठन क्षमता के लिए हैं, न कि सैन्य उद्देश्य के लिए।

हिंदू पहचान समाज को जोड़ती है

भागवत ने कहा कि मत, पंथ, भाषा और जाति अलग हो सकती है, लेकिन हिंदू पहचान हम सभी को जोड़ती है। हमारी संस्कृति, धर्म और पूर्वज समान हैं और यही एकता भारत की ताकत है।

मोहन भागवत की स्पीच की 10 बड़ी बातें

1. स्वदेशी अर्थव्यवस्था पर जोर

अमेरिका के टैरिफ जैसे वैश्विक मुद्दों पर भागवत ने कहा कि भारत को स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देनी चाहिए। विदेशी वस्तु की जरूरत पड़े तो वह भारत की शर्तों पर हो। भारत आत्मनिर्भर बनने में सक्षम है।

2. नई पीढ़ी को भारतीय मूल्यों से जोड़ने की जरूरत

जेन-जी और युवाओं को भारतीय संस्कृति, इतिहास और संस्कारों से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बचपन से राष्ट्रीय दृष्टि सिखाई जाती है।

3. फैशन और फास्ट फूड संस्कृति पर चिंता

भागवत ने कहा कि अंधाधुंध उपभोक्तावाद समाज को कमजोर कर रहा है। घर में विवेकानंद का चित्र होगा या किसी पॉप स्टार का, यह समाज की दिशा तय करता है। परिवार के साथ बैठकर भोजन करने की परंपरा लौटानी होगी।

4. संघ को लेकर गलत नैरेटिव

उन्होंने कहा कि समर्थक और विरोधी, दोनों ही कई बार संघ को लेकर गलत छवि पेश करते हैं। संघ की असली पहचान समाज निर्माण है और इसी को स्पष्ट करने के लिए संवाद कार्यक्रम किए जा रहे हैं।

5. न प्रतिक्रिया में जन्मा, न प्रतिस्पर्धा में

RSS किसी के विरोध में या प्रतिक्रिया स्वरूप नहीं बना। संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने स्वतंत्रता आंदोलन और समाज की जरूरतों को समझकर संघ की स्थापना की।

6. समाज बदलेगा तो देश बदलेगा

भागवत ने कहा कि देश का भविष्य नेता या नीतियां नहीं, बल्कि समाज तय करता है। समाज में ‘स्व’ का बोध होगा तभी स्वतंत्रता स्थायी रहेगी।

7. प्रेशर ग्रुप नहीं, समाज का संगठन

RSS ने शुरू से तय किया कि वह किसी दबाव समूह की तरह काम नहीं करेगा। उसका लक्ष्य सम्पूर्ण हिंदू समाज का संगठन करना है।

8. संघ केवल स्वयंसेवक बनाता है

संघ स्वयंसेवक तैयार करता है। वे समाज की जरूरत के अनुसार अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करते हैं। संघ किसी को रिमोट कंट्रोल से संचालित नहीं करता।

9. सज्जन शक्ति का नेटवर्क जरूरी

भागवत ने कहा कि समाज सुधार का काम केवल संघ ही नहीं कर रहा। सभी मत-पंथों में अच्छे लोग हैं। जरूरत है उनके बीच सहयोगी नेटवर्क बनाने की।

10. पंच परिवर्तन का आह्वान

सरसंघचालक ने समाज और राष्ट्र की उन्नति के लिए पंच परिवर्तन बताए

  • सामाजिक समरसता

  • कुटुंब प्रबोधन

  • पर्यावरण संरक्षण

  • स्व-बोध

  • नागरिक अनुशासन

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