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: Reservation in Jobs : भारत में आरक्षण के 75 साल बाद भी क्यों बुरी है SC/ST की स्थिति, पढ़िए ये पूरी खबर...

MP CG Times / Fri, Oct 8, 2021

Caste Wise Representation In Government Jobs: देश में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले आरक्षण को लेकर अक्सर चर्चा की जाती है. समाज का एक वर्ग जाति के आधार पर आरक्षण (Caste Wise Employment in India) को गैर जरूरी बताता है वहीं एक दूसरा पक्ष इसका पूरजोर समर्थन करता है. इसे भी पढ़ें: MP में साधू की समाधि लीला ! गाजे-बाजे के साथ समाधि ले रहे थे 105 साल के पप्पड़ बाबा, फिर पुलिस ने किया ये काम हम आज आरक्षण अच्छा है या बुरा, इस मुद्दे पर बात नहीं कर रहे हैं. बल्कि आज बात उस मुद्दे पर हो रही है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 75 सालों से मिल रहे आरक्षण के बावजूद सरकारी नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी कैसी है? क्या उनकी स्थिति में सुधार हुआ है? इसे भी पढ़ें: सेक्स की आड़ में कत्ल: MP में युवक को रास्ते में रोक जिस्मानी संबंध बनाने की जिद पर अड़ी अजनबी युवती! फिर हुआ खूनी खेल… दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में एससी और एसटी वर्ग को प्रोमोशन में मिलने वाले आरक्षण से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से सवाल किया था कि वह बताए कि सरकारी नौकरियों में इन वर्गों की स्थिति कैसी है. 19 केंद्रीय मंत्रालयों में कुल 1,23,155 लोग करते हैं काम इसके बाद केंद्र सरकार ने बुधवार को अपने 19 मंत्रालयों द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों को पेश किया. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. इन आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार के 19 मंत्रालयों में कुल 1,23,155 लोग काम करते हैं. इनमें से अनुसूचित जाति (SC) के 15.34 फीसदी, अनुसूचित जनजाति (ST) के 6.18 फीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के 17.5 फीसदी लोग कार्यरत हैं.
  इसे भी पढ़ें: सेक्स रैकेट का भंडाफोड़: पुलिस की छापेमारी में 4 युवती और 2 युवक गिरफ्तार, कुछ संदिग्ध हालत में भी मिले इसके साथ ही केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल बलवीर सिंह ने कहा कि इस बारे में सरकार जल्द ही एक व्यापक आंकड़ा पेश करेगी. उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के अधीन 53 विभाग हैं और उनमें 5000 लोगों की तैनाती का प्रावधान है. क्लास-1 की नौकरियों में सबसे कम प्रतिनिधित्व सॉलिसिटर जनरल बलवीर सिंह ने अपने जवाब में यह बात कही है कि क्लास-1 की नौकरियों में एससी और एसटी वर्ग के लोगों की भागीदारी बहुत कम है. उन्होंने आगे कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम बीते 75 सालों में एससी और एसटी वर्ग को मेरिट में बराबरी के स्तर पर नहीं ला पाए हैं. उन्होंने कहा कि प्रतिनिधित्व में कमी का कारण इस स्तर पर प्रोमोशन में आरक्षण का नहीं होना है. उन्होंने शीर्ष अदालत से यह भी कहा कि अगर किसी तरह की निरंकुशता नहीं है तो उसे आरक्षण के मसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. सॉलिसिटर जनरल ने आगे कहा कि इन आंकड़ों में कुछ असंगति हो सकती है क्योंकि इस सर्वे में सामान्य वर्ग कोटे से आने वाले एससी और एसटी कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है. उन्होंने कहा कि क्लास-3 और क्लास-4 की नौकरियों में इन वर्गों के कर्मचारियों की भागीदारी अधिक है लेकिन क्लास-1 की नौकरियों में इनकी भागीदार बहुत कम है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार क्लास के हिसाब से आंकड़े पेश करेगी. केंद्र और कई राज्यों में रोस्टर सिस्टम अपनाया जाता है शीर्ष अदालत में केंद्र सरकार ने कहा कि वह और कई अन्य राज्यों की सरकारें आरक्षण के मसले में रोस्टर सिस्टम को लागू करती हैं. रोस्टर सिस्टम को आबादी में प्रतिनिधित्व प्रतिशत से लिंक किया गया है.
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