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: भोपाल गैस त्रासदी: परिवार कल्याण के सचिव और ICMR के डिप्टी डायरेक्टर तलब, अगली सुनवाई 5 दिसंबर को

News Desk / Tue, Nov 29, 2022


भोपाल गैस त्रासदी

भोपाल गैस त्रासदी - फोटो : सोशल मीडिया

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भोपाल गैस त्रासदी में सुनवाई के दौरान इंडियन काउसिंल ऑफ मेडिकल रिर्सच के डिप्टी डायरेक्टर ने युगलपीठ को बताया कि आवश्यकतानुसार डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ की नियुक्तियों के लिए आईसीएमआर ने केन्द्रीय स्वास्थ और परिवार कल्याण को दो पत्र लिखे हैं। युगलपीठ ने अगली सुनवाई 5 दिसंबर को निर्धारित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ एवं परिवार कल्याण के सचिव तथा आईसीएमआर के डिप्टी डायरेक्टर को वर्जुअल रूप से उपस्थित रहने के आदेश जारी किए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार और पुनार्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी का गठित करने के निर्देश भी जारी किए थे। मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन महीने में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने तथा रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगी। उसके बाद उक्त याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका दायर की गई थी। अवमानना याचिका में कहा गया था कि गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने है। अस्पतालों में आवश्यकता अनुसार उपकरण और दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

बीएमएचआरसी के भर्ती नियम का निर्धारण नहीं होने के कारण डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टॉफ स्थाई तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करते हैं। अवमानना याचिका में केन्द्रीय परिवार कल्याण विभाग के सचिव रंजन भूषण, केन्द्रीय रसायन और उर्वरक विभाग के सचिव आरती आहूजा, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, भोपाल गैस त्रासदी सहायत एवं पुनर्वास विभाग के सचिव मोहम्मद सुलेमान, आईसीएमआर के वरिष्ठ डिप्टी डायरेक्टर आर राम तथा बीएमएसआरसी के संचालक डॉ. प्रभा तथा एनआईआरई के संचालक राजनारायण तिवारी को अनावेदक बनाया गया था।

पिछली सुनवाई के दौरान बीएमएचआरसी में डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टॉफ की नियुक्ति के संबंध में पारित आदेश का परिपालन नहीं होने पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की थी। युगलपीठ ने आईसीएमआर के चेयरमैन आर राम कृष्णन को वर्जुअल रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिये थे। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने उक्त जानकारी युगलपीठ को देते हुए हलफनामा भी पेश किया। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता काशी पटेल ने पैरवी की।

विस्तार

भोपाल गैस त्रासदी में सुनवाई के दौरान इंडियन काउसिंल ऑफ मेडिकल रिर्सच के डिप्टी डायरेक्टर ने युगलपीठ को बताया कि आवश्यकतानुसार डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ की नियुक्तियों के लिए आईसीएमआर ने केन्द्रीय स्वास्थ और परिवार कल्याण को दो पत्र लिखे हैं। युगलपीठ ने अगली सुनवाई 5 दिसंबर को निर्धारित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ एवं परिवार कल्याण के सचिव तथा आईसीएमआर के डिप्टी डायरेक्टर को वर्जुअल रूप से उपस्थित रहने के आदेश जारी किए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार और पुनार्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी का गठित करने के निर्देश भी जारी किए थे। मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन महीने में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करने तथा रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगी। उसके बाद उक्त याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी। याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किए जाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका दायर की गई थी। अवमानना याचिका में कहा गया था कि गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने है। अस्पतालों में आवश्यकता अनुसार उपकरण और दवाएं उपलब्ध नहीं हैं।

बीएमएचआरसी के भर्ती नियम का निर्धारण नहीं होने के कारण डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टॉफ स्थाई तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करते हैं। अवमानना याचिका में केन्द्रीय परिवार कल्याण विभाग के सचिव रंजन भूषण, केन्द्रीय रसायन और उर्वरक विभाग के सचिव आरती आहूजा, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, भोपाल गैस त्रासदी सहायत एवं पुनर्वास विभाग के सचिव मोहम्मद सुलेमान, आईसीएमआर के वरिष्ठ डिप्टी डायरेक्टर आर राम तथा बीएमएसआरसी के संचालक डॉ. प्रभा तथा एनआईआरई के संचालक राजनारायण तिवारी को अनावेदक बनाया गया था।

पिछली सुनवाई के दौरान बीएमएचआरसी में डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टॉफ की नियुक्ति के संबंध में पारित आदेश का परिपालन नहीं होने पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की थी। युगलपीठ ने आईसीएमआर के चेयरमैन आर राम कृष्णन को वर्जुअल रूप से उपस्थित रहने के आदेश दिये थे। याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने उक्त जानकारी युगलपीठ को देते हुए हलफनामा भी पेश किया। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता काशी पटेल ने पैरवी की।


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