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: MahaShivratri 2023: दमोह में स्थित है हजारों साल पुराना शिव मंदिर, कल्चुरी कालीन शासकों ने करवाया था निर्माण

News Desk / Fri, Feb 17, 2023


हजारों साल पुराना शिव मंदिर

हजारों साल पुराना शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दमोह जिले में स्थित शिव मंदिर में पूरे जिले सहित प्रदेश के भी लोग दर्शन-पूजन करने के लिए आते हैं। आज महाशिवरात्रि पर्व पर भी हजारों की संख्या में लोग भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। तेंदूखेड़ा से तारादेही सड़क मार्ग पर ग्राम पंचायत कोड़ल है। यहां स्थित है कल्चुरी शासकों द्वारा बनवाया गया प्राचीन शिव मंदिर। यह शिव मंदिर सांस्कृतिक और पुरातत्व की धरोहर है। मंदिर के चारो ओर अद्भुत कलाकृतियों की नक्काशी पत्थरों पर की गई है।

बता दें कि खजुराहो की तरह कलाकृतियों का यह मंदिर 950 ईसवी में कल्चुरी शासकों द्वारा बनवाया गया था, लेकिन कुछ लोग इसे चंदेलवंशी भी मानते हैं। मंदिर की कलाकृतियां अनोखी हैं, जिसकी देख-रेख वर्तमान में पुरातत्व विभाग सागर के जिम्मे है। शासन द्वारा मंदिर में समय-समय पर धुलाई की जाती है। साथ ही मंदिर की पूर्ण सुरक्षा के लिए एक स्मारक परिचायक और दो दैनिक कर्मचारी भी नियुक्त हैं।

यह है विशेषताएं...
मंदिर परिसर के अंदर एक बड़ा मढ़ा भी बना हुआ है। पूर्व में इस मढ़ का कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। क्षतिग्रस्त हिस्से का शासन द्वारा जीर्णोद्धार कराया गया है। गांव के बुजुर्गों द्वारा बताया गया कि पूर्व में उनके बुजुर्गों द्वारा बताया गया कि इस मढ़ा में ब्राह्मणों को शिक्षा दी जाती थी। मंदिर के आसपास काफी पुरात्विक धरोहरें हैं। महाशिवरात्रि के दिन भगवान के दर्शनों के लिए अपार जनसमूह एकत्रित होता है।

आसपास के गांव से लेकर सागर, देवरी, जबलपुर, पाटन, महाराजपुर और दमोह के भक्त भगवान की आराधना करने के लिए कोड़ल पहुंचते हैं। स्मारक परिचायक मुन्नालाल अग्रवाल द्वारा बताया गया कि मंदिर की सफाई शासन द्वारा कराई जाती है। मंदिर की पूर्ण सुरक्षा के लिए वे यहां पदस्थ हैं। मंदिर में गजबियार जानवर के निशान भी हैं, जिसके कारण यह मंदिर चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित प्रतीत होता है।


यह शिव मंदिर 950 ईसवी में लगभग बनाया गया था, जिसकी देखरेख पुरातत्व विभाग सागर के अधीनस्थ है। कोड़ल मंदिर समिति के सदस्यों में गुड्डा सिंह, कुंजीलाल चौकसे, गणेश चौकसे, भूपत यादव, राजू चौकसे, मक्खन यादव, गनेश यादव, उदयराम यादव के अलावा अन्य सदस्य हैं, जो प्रतिवर्ष मंदिर में रामचरित मानस आयोजन करवाते हैं।


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