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: MP News: धोखाधड़ी के आरोपियों ने कोर्ट को भी रखा धोखे में, अपनी जगह दूसरों को किया पेश, कोर्ट ने भेजा था जेल

News Desk / Thu, Dec 8, 2022


Jail demo

Jail demo - फोटो : फाइल फोटो

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धोखाधड़ी के प्रकरण में आरोपी के स्थान पर दूसरे व्यक्ति न्यायालय में उपस्थित हुए। न्यायालय ने सजा से दंडित किया तो वास्तविक आरोपियों के स्थान पर उन्हें जेल भेज दिया। जमानत पर रिहा होने के बाद पीड़ित व्यक्ति ने इस संबंध में शिकायत की। जांच के बाद मंडला पुलिस ने शिकायतकर्ता व्यक्ति सहित सात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।

गौरतलब है कि पीड़ित कोमल पांडे उम्र 45 निवासी आमनपुर ने 13 अप्रैल 2022 को पुलिस अधीक्षक जबलपुर सिद्धार्थ बहुगुणा से शिकायत की थी कि ठेकेदार अमित खम्परिया ने कान्हा में वन विभाग को नाका साल 2011 में लिया था। टोल नाका में पर्यटकों से अधिक शुल्क लिया जाता था। अधिक शुल्क की राशि को मार्कर से मिटा कर सही कर दिया जाता था। शिकायत पर मंडला जिले की खटिया थाना ठेकेदार अमित खम्परिया, उसके पिता अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत दो प्रकरण दर्ज किया थे।

पीड़ित ने बताया कि आरोपियों को प्रकरण में जमानत मिल गई थी। अमित खम्परिया उसे तथा अन्य 3-4 लोगों को लेकर 15 सितंबर 2021 को नैनपुर कोर्ट पहुंचा था और कोर्ट रूम में कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। इसके बाद अमित खम्परिया के गुर्गे उसे तथा उन्हीं लोगों को लेकर 22 सितम्बर 2021 को नैनपुर कोर्ट पहुंचे। नैनपुर कोर्ट के एडीजे ने धोखाधड़ी के मामले में पांच व्यक्तियों को पांच-पांच साल की सजा से दंडित किया। प्रकरण में आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जबकि 6 व्यक्ति फरार थे।

न्यायालय में उससे अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी उम्र 70 के नाम से हस्ताक्षर करवाए गए थे। हस्ताक्षर करवाने के बाद पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल ले गई। इसके अलावा दोषी करार दिए गए दो अन्य व्यक्तियों के स्थान पर दो अन्य व्यक्तियों को जेल भेज गया था। नैनपुर जेल में उसने अपना सही नाम बताया तो जेल अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानते हुए कहा कि तुम अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी हो। प्रकरण में 84 दिनों बाद उसे हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिला। जिसके बाद ठेकेदार अमित खम्परिया ने इस संबंध में किसी को कुछ बताने पर परिवार से जान से मारने की धमकी दी थी। जेल से रिहा होने के चार माह बाद मनोस्थिति ठीक होने पर शिकायत दर्ज करवाई है।

पुलिस अधीक्षक जबलपुर ने शिकायत की जांच सीएसपी बरगी प्रियंका शुक्ला को सौंपी थी। जांच के दौरान मंडला जेल से आरोपियों के फोटो मंगवाए गए थे। फोटो की पहचान करने पर पाया गया कि अनिरुद्ध चतुर्वेदी, रामजी द्विवेदी तथा दशरथ तिवारी कभी मंडला जेल में निरुद्ध नहीं थे। उनके स्थान पर कोमल पांडे, श्याम सुंदर खम्परिया तथा विराट तिवारी निरुद्ध थे। शिकायतकर्ता के फिंगर प्रिंट की जांच नेफिट सॉफ्टवेयर के माध्यम से की गई। जिसमें पाया गया कि उक्त फिंगर प्रिंट न्यायालय द्वारा सजा से दंडित अनिरुद्ध चतुर्वेदी के हैं। जेल में बंद तीनों आरोपियों से एक अधिवक्ता ने 15 बार मुलाकात की थी तथा परिजनों के 38 बार मोबाइल फोन से बात की थी। शिकायतकर्ता की पत्नी से 16 बार मोबाइल से बात की थी।

जांच रिपोर्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए मंडला पुलिस को सौंपा गया था। मंडला के नैनपुर थाना प्रभारी आरएम दुबे ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर अमित खम्परिया, अनिरुद्ध चतुर्वेदी, रामजी द्विवेदी, दशरथ तिवारी, कोमल पांडे, विराट तिवारी, श्याम सुंदर सहित अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धारा 417, 419, 420, 466, 467, 471, 506, 120बी तथा 34 के तहत अपराध दर्ज कर प्रकरण को विवेचना में लिया गया है। जांच को जो अन्य व्यक्ति की भूमिका प्रकाश में आती है तो उनके खिलाफ भी विधिवत जांच की जाएगी। 

विस्तार

धोखाधड़ी के प्रकरण में आरोपी के स्थान पर दूसरे व्यक्ति न्यायालय में उपस्थित हुए। न्यायालय ने सजा से दंडित किया तो वास्तविक आरोपियों के स्थान पर उन्हें जेल भेज दिया। जमानत पर रिहा होने के बाद पीड़ित व्यक्ति ने इस संबंध में शिकायत की। जांच के बाद मंडला पुलिस ने शिकायतकर्ता व्यक्ति सहित सात लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।

गौरतलब है कि पीड़ित कोमल पांडे उम्र 45 निवासी आमनपुर ने 13 अप्रैल 2022 को पुलिस अधीक्षक जबलपुर सिद्धार्थ बहुगुणा से शिकायत की थी कि ठेकेदार अमित खम्परिया ने कान्हा में वन विभाग को नाका साल 2011 में लिया था। टोल नाका में पर्यटकों से अधिक शुल्क लिया जाता था। अधिक शुल्क की राशि को मार्कर से मिटा कर सही कर दिया जाता था। शिकायत पर मंडला जिले की खटिया थाना ठेकेदार अमित खम्परिया, उसके पिता अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं के तहत दो प्रकरण दर्ज किया थे।

पीड़ित ने बताया कि आरोपियों को प्रकरण में जमानत मिल गई थी। अमित खम्परिया उसे तथा अन्य 3-4 लोगों को लेकर 15 सितंबर 2021 को नैनपुर कोर्ट पहुंचा था और कोर्ट रूम में कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। इसके बाद अमित खम्परिया के गुर्गे उसे तथा उन्हीं लोगों को लेकर 22 सितम्बर 2021 को नैनपुर कोर्ट पहुंचे। नैनपुर कोर्ट के एडीजे ने धोखाधड़ी के मामले में पांच व्यक्तियों को पांच-पांच साल की सजा से दंडित किया। प्रकरण में आरोपी बनाए गए एक व्यक्ति की मौत हो गई थी जबकि 6 व्यक्ति फरार थे।



न्यायालय में उससे अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी उम्र 70 के नाम से हस्ताक्षर करवाए गए थे। हस्ताक्षर करवाने के बाद पुलिस उसे गिरफ्तार कर जेल ले गई। इसके अलावा दोषी करार दिए गए दो अन्य व्यक्तियों के स्थान पर दो अन्य व्यक्तियों को जेल भेज गया था। नैनपुर जेल में उसने अपना सही नाम बताया तो जेल अधिकारी ने उसकी बात नहीं मानते हुए कहा कि तुम अनिरुद्ध प्रताप चतुर्वेदी हो। प्रकरण में 84 दिनों बाद उसे हाईकोर्ट से जमानत का लाभ मिला। जिसके बाद ठेकेदार अमित खम्परिया ने इस संबंध में किसी को कुछ बताने पर परिवार से जान से मारने की धमकी दी थी। जेल से रिहा होने के चार माह बाद मनोस्थिति ठीक होने पर शिकायत दर्ज करवाई है।

पुलिस अधीक्षक जबलपुर ने शिकायत की जांच सीएसपी बरगी प्रियंका शुक्ला को सौंपी थी। जांच के दौरान मंडला जेल से आरोपियों के फोटो मंगवाए गए थे। फोटो की पहचान करने पर पाया गया कि अनिरुद्ध चतुर्वेदी, रामजी द्विवेदी तथा दशरथ तिवारी कभी मंडला जेल में निरुद्ध नहीं थे। उनके स्थान पर कोमल पांडे, श्याम सुंदर खम्परिया तथा विराट तिवारी निरुद्ध थे। शिकायतकर्ता के फिंगर प्रिंट की जांच नेफिट सॉफ्टवेयर के माध्यम से की गई। जिसमें पाया गया कि उक्त फिंगर प्रिंट न्यायालय द्वारा सजा से दंडित अनिरुद्ध चतुर्वेदी के हैं। जेल में बंद तीनों आरोपियों से एक अधिवक्ता ने 15 बार मुलाकात की थी तथा परिजनों के 38 बार मोबाइल फोन से बात की थी। शिकायतकर्ता की पत्नी से 16 बार मोबाइल से बात की थी।


जांच रिपोर्ट को आवश्यक कार्रवाई के लिए मंडला पुलिस को सौंपा गया था। मंडला के नैनपुर थाना प्रभारी आरएम दुबे ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर अमित खम्परिया, अनिरुद्ध चतुर्वेदी, रामजी द्विवेदी, दशरथ तिवारी, कोमल पांडे, विराट तिवारी, श्याम सुंदर सहित अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धारा 417, 419, 420, 466, 467, 471, 506, 120बी तथा 34 के तहत अपराध दर्ज कर प्रकरण को विवेचना में लिया गया है। जांच को जो अन्य व्यक्ति की भूमिका प्रकाश में आती है तो उनके खिलाफ भी विधिवत जांच की जाएगी। 

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