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: Shahdol: एक दोस्त की मौत, घायल दोस्त को बचाने में जुटा रहा दूसरा जख्मी शख्स! पढ़ें, जंगल में जद्दोजहद की कहानी

News Desk / Mon, Jan 9, 2023


प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

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आप खुद सोचिए कि यदि आपके साथ ऐसी स्थिति बन जाए! रात का वक्त हो, घनघोर जंगल हो, चार डिग्री तापमान हो और सामने कोई मृत व्यक्ति पड़ा हो, दूसरा गंभीर रूप से कराह रहा हो और खुद भी तीसरा व्यक्ति घायल हो ऐसे में वह किस परिस्थिति से गुजरेगा? उसे खुद की जान बचानी है और दूसरी ओर कराह रहे घायल दोस्त की भी जान बचानी है। हां, घनघोर जंगल में आधी रात में जंगली जानवरों से भी बचना है। 
जी हां, कुछ ऐसी ही घटना हुई है शहडोल जिले के जैतपुर थाने के झींकबिजुरी चौकी अंतर्गत मिठौली गांव के पास। एक दोस्त की जिंदगी बचाने के लिए दूसरा घायल दोस्त किस तरह से रात भर संघर्ष करता है पूरी कहानी जानकर आपका भी दिल भर आएगा।

रात 11 बजे तीन दोस्त निकले थे बाइक पर
यह घटना रात 11:00 बजे की है जब तीन दोस्त बाइक पर सवार होकर अपने घर के लिए निकले, तभी जैतपुर के झींक बिजुरी चौकी अंतर्गत मिठौली गांव के पास ही घनघोर जंगल में आधी रात में सड़क दुर्घटना हो जाती है। इसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो जाती है और दो लोग घायल हो जाते हैं, जिसमें से एक गंभीर रूप से घायल है। 

नहीं हारी हिम्मत घायल दोस्त को सड़क पर लाया
झींकबिजुरी चौकी प्रभारी श्याम सिंह बताते हैं कि मिठौली गांव के पास हुई इस घटना में श्यामलाल पलिहा की मौके पर ही मौत हो जाती है, मंगल दीन पांडव गंभीर रूप से घायल हो जाता है और तीसरा बाइक चालक समय लाल गोंड भी घायल होता है, लेकिन उसे थोड़ी कम चोट आती है। वह दोस्त को तड़पता देख किसी कदर वहां से उठता है और अपने घायल दोस्त को लेकर रोड पर आता है। वह घनघोर जंगल के बीच कड़ाके की ठंड में पूरी रात मदद का इंतजार करते रहता है, लेकिन सुनसान रास्ते में कोई भी उस दौरान नहीं निकलता है और इसी तरह मदद की आस में पूरी रात निकल जाती है।

10 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे गांव
जब घायल श्यामलाल गोंड को लगता है कि उन्हें ही कुछ करना होगा तो तड़प रहे दोस्त की हालत देख कर है, वे पैदल ही तड़के गांव की ओर चल पड़ते हैं और घटनास्थल मिठौली से लगभग 10 किलोमीटर दूर अपने गांव गलहथा पहुंचते हैं जहां वो सारी बात मृतक के घर में बताते हैं और फिर लोग मदद के लिए पहुंचते हैं। 

घायल अवस्था में पैदल पहुंचे गांव 
श्यामलाल, खुद घायल थे, लेकिन दोस्त को तड़पता देख उनसे रहा न गया और घायल अवस्था में ही वो पैदल ही गांव सुबह 6:00 बजे पहुंचे। जहां से गांव वालों को खबर दी और फिर वहीं से पुलिस वालों को भी सूचना दी गई और फिर पुलिस वाले भी मौके पर पहुंचे जहां घायल दोस्त को उठाकर अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक घायल का इलाज अब मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।

ये संघर्ष नहीं आसान 
गौरतलब है कि एक दोस्त का दूसरे दोस्त को बचाने का यह संघर्ष आसान नहीं था क्योंकि, घनघोर जंगल था जहां भालू जैसे खूंखार जानवरों का डर बना रहता है। वहीं, एक मृत व्यक्ति भी पड़ा हुआ था, दूसरा दोस्त गंभीर अवस्था में मदद की गुहार लगा रहा था और तीसरा दोस्त कुछ कर नहीं पा रहा था, क्योंकि वो भी घायल था। ऐसे में दूसरे दोस्त के हौसले की अब हर कोई तारीफ कर रहा है। झींक बिजुरी चौकी प्रभारी श्याम सिंह के मुताबिक फिलहाल घायल का इलाज चल रहा है। श्यामलाल को कम चोटें आने से वह ठीक है। 

विस्तार

आप खुद सोचिए कि यदि आपके साथ ऐसी स्थिति बन जाए! रात का वक्त हो, घनघोर जंगल हो, चार डिग्री तापमान हो और सामने कोई मृत व्यक्ति पड़ा हो, दूसरा गंभीर रूप से कराह रहा हो और खुद भी तीसरा व्यक्ति घायल हो ऐसे में वह किस परिस्थिति से गुजरेगा? उसे खुद की जान बचानी है और दूसरी ओर कराह रहे घायल दोस्त की भी जान बचानी है। हां, घनघोर जंगल में आधी रात में जंगली जानवरों से भी बचना है। 


जी हां, कुछ ऐसी ही घटना हुई है शहडोल जिले के जैतपुर थाने के झींकबिजुरी चौकी अंतर्गत मिठौली गांव के पास। एक दोस्त की जिंदगी बचाने के लिए दूसरा घायल दोस्त किस तरह से रात भर संघर्ष करता है पूरी कहानी जानकर आपका भी दिल भर आएगा।

रात 11 बजे तीन दोस्त निकले थे बाइक पर
यह घटना रात 11:00 बजे की है जब तीन दोस्त बाइक पर सवार होकर अपने घर के लिए निकले, तभी जैतपुर के झींक बिजुरी चौकी अंतर्गत मिठौली गांव के पास ही घनघोर जंगल में आधी रात में सड़क दुर्घटना हो जाती है। इसमें एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो जाती है और दो लोग घायल हो जाते हैं, जिसमें से एक गंभीर रूप से घायल है। 

नहीं हारी हिम्मत घायल दोस्त को सड़क पर लाया
झींकबिजुरी चौकी प्रभारी श्याम सिंह बताते हैं कि मिठौली गांव के पास हुई इस घटना में श्यामलाल पलिहा की मौके पर ही मौत हो जाती है, मंगल दीन पांडव गंभीर रूप से घायल हो जाता है और तीसरा बाइक चालक समय लाल गोंड भी घायल होता है, लेकिन उसे थोड़ी कम चोट आती है। वह दोस्त को तड़पता देख किसी कदर वहां से उठता है और अपने घायल दोस्त को लेकर रोड पर आता है। वह घनघोर जंगल के बीच कड़ाके की ठंड में पूरी रात मदद का इंतजार करते रहता है, लेकिन सुनसान रास्ते में कोई भी उस दौरान नहीं निकलता है और इसी तरह मदद की आस में पूरी रात निकल जाती है।


10 किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचे गांव
जब घायल श्यामलाल गोंड को लगता है कि उन्हें ही कुछ करना होगा तो तड़प रहे दोस्त की हालत देख कर है, वे पैदल ही तड़के गांव की ओर चल पड़ते हैं और घटनास्थल मिठौली से लगभग 10 किलोमीटर दूर अपने गांव गलहथा पहुंचते हैं जहां वो सारी बात मृतक के घर में बताते हैं और फिर लोग मदद के लिए पहुंचते हैं। 

घायल अवस्था में पैदल पहुंचे गांव 
श्यामलाल, खुद घायल थे, लेकिन दोस्त को तड़पता देख उनसे रहा न गया और घायल अवस्था में ही वो पैदल ही गांव सुबह 6:00 बजे पहुंचे। जहां से गांव वालों को खबर दी और फिर वहीं से पुलिस वालों को भी सूचना दी गई और फिर पुलिस वाले भी मौके पर पहुंचे जहां घायल दोस्त को उठाकर अस्पताल ले जाया गया। पुलिस के मुताबिक घायल का इलाज अब मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।


ये संघर्ष नहीं आसान 
गौरतलब है कि एक दोस्त का दूसरे दोस्त को बचाने का यह संघर्ष आसान नहीं था क्योंकि, घनघोर जंगल था जहां भालू जैसे खूंखार जानवरों का डर बना रहता है। वहीं, एक मृत व्यक्ति भी पड़ा हुआ था, दूसरा दोस्त गंभीर अवस्था में मदद की गुहार लगा रहा था और तीसरा दोस्त कुछ कर नहीं पा रहा था, क्योंकि वो भी घायल था। ऐसे में दूसरे दोस्त के हौसले की अब हर कोई तारीफ कर रहा है। झींक बिजुरी चौकी प्रभारी श्याम सिंह के मुताबिक फिलहाल घायल का इलाज चल रहा है। श्यामलाल को कम चोटें आने से वह ठीक है। 

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