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: Vyapam Forgery: आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 के दो सॉल्वर और दो मूल परीक्षार्थी को सजा, 14-14 हजार रुपये जुर्माना

News Desk / Mon, Dec 5, 2022


(सांकेतिक तस्वीर)

(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

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ग्वालियर में सीबीआई की विशेष अदालत ने पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 में मूल परीक्षार्थी की जगह फर्जी सॉल्वर बनकर एग्जाम में शामिल होने वाले दो लोगों सहित दो मूल परिक्षार्थियों को चार-चार साल की सजा से दंडित किया है। इन सभी पर 14-14 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया है। तीन आरोपी उत्तर प्रदेश और एक राजस्थान के रहने वाले बताए गए हैं और एक आरोपी नाबालिग है। इसलिए उसका चालान किशोर कल्याण बोर्ड में सीबीआई ने अलग से पेश किया है।

दरअसल, उमेश सोनकर और पवन मीणा के खिलाफ कंपू पुलिस ने परीक्षा अधिनियम सहित आपराधिक षड्यंत्र धोखाधड़ी और कूट रचित दस्तावेज तैयार करने की लगभग आधा दर्जन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें जगदीश और अनिल कुमार का पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में चयन कराने के मकसद से उमेश और पवन मीणा परीक्षा में आईपीएस कॉलेज में आयोजित इस परीक्षा में शामिल होने गए थे। लेकिन वहां उनकी संदिग्ध हरकत के बाद केंद्राध्यक्ष को कुछ शक हुआ। उन्होंने आरोपियों के फोटो मिसमैच और हस्ताक्षर में अंतर होते ही उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दे दी।

पुलिस ने फर्जी परीक्षार्थियों के अलावा मूल परीक्षार्थियों जगदीश और अनिल को भी आरोपी बनाया और उन्हें पकड़ लिया। इसमें एक आरोपी नाबालिग था, उसने बिचौलिए की भूमिका अदा की थी। केंद्राध्यक्ष की शिकायत पर कंपू थाने ने आपराधिक मामला सभी पांच आरोपियों के खिलाफ खिलाफ दर्ज किया था। सभी आरोपियों को विभिन्न धाराओं में अधिकतम चार-चार साल की सजा से दंडित किया गया है। उन पर 14-14 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया है।

विस्तार

ग्वालियर में सीबीआई की विशेष अदालत ने पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 में मूल परीक्षार्थी की जगह फर्जी सॉल्वर बनकर एग्जाम में शामिल होने वाले दो लोगों सहित दो मूल परिक्षार्थियों को चार-चार साल की सजा से दंडित किया है। इन सभी पर 14-14 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया है। तीन आरोपी उत्तर प्रदेश और एक राजस्थान के रहने वाले बताए गए हैं और एक आरोपी नाबालिग है। इसलिए उसका चालान किशोर कल्याण बोर्ड में सीबीआई ने अलग से पेश किया है।

दरअसल, उमेश सोनकर और पवन मीणा के खिलाफ कंपू पुलिस ने परीक्षा अधिनियम सहित आपराधिक षड्यंत्र धोखाधड़ी और कूट रचित दस्तावेज तैयार करने की लगभग आधा दर्जन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। इसमें जगदीश और अनिल कुमार का पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा में चयन कराने के मकसद से उमेश और पवन मीणा परीक्षा में आईपीएस कॉलेज में आयोजित इस परीक्षा में शामिल होने गए थे। लेकिन वहां उनकी संदिग्ध हरकत के बाद केंद्राध्यक्ष को कुछ शक हुआ। उन्होंने आरोपियों के फोटो मिसमैच और हस्ताक्षर में अंतर होते ही उन्होंने पुलिस को इसकी सूचना दे दी।

पुलिस ने फर्जी परीक्षार्थियों के अलावा मूल परीक्षार्थियों जगदीश और अनिल को भी आरोपी बनाया और उन्हें पकड़ लिया। इसमें एक आरोपी नाबालिग था, उसने बिचौलिए की भूमिका अदा की थी। केंद्राध्यक्ष की शिकायत पर कंपू थाने ने आपराधिक मामला सभी पांच आरोपियों के खिलाफ खिलाफ दर्ज किया था। सभी आरोपियों को विभिन्न धाराओं में अधिकतम चार-चार साल की सजा से दंडित किया गया है। उन पर 14-14 हजार रुपये का अर्थ दंड भी लगाया गया है।


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