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: MP में 9 साल, 12 घटनाएं, 163 मौतें: सिस्टम की बड़ी लापरवाही, हर बार कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करती है सरकार, पढ़िए सिलसिलेवार घटनाएं

9 years, 12 incidents, 163 deaths in MP... मध्य प्रदेश के हरदा जिले में हुए धमाके के बाद एक बार फिर साबित हो गया है कि यह सिस्टम की लापरवाही है। इतनी बड़ी पटाखा फैक्ट्री अवैध रूप से चल रही थी लेकिन प्रशासन सो रहा था। घटना के बाद सरकार की ओर से कार्रवाई की तो खूब चर्चा हो रही है, लेकिन पिछली घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया गया। पिछले 9 सालों में मध्य प्रदेश में ऐसी 12 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें से अब तक 163 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन अवैध फैक्ट्रियों के संचालन पर रोक नहीं लग सकी है। आइए आपको बताते हैं मध्य प्रदेश में हुई सिलसिलेवार घटनाओं के बारे में। वहीं, हरदा में 6 फरवरी 2024 को अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए ब्लास्ट के बाद 11 लोगों की मौत हो गई है। साथ ही 200 से अधिक लोग घायल हुए हैं। दमोह में 31 अक्टूबर 2023 को अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था। इसमें पांच लोगों की मौत हुई थी और आठ लोग घायल हुए थे। यह अवैध फैक्ट्री भी रहवासी इलाके में चल रहा था। ब्लास्ट के बाद घर का छत गिर गया था। इसमें फैक्ट्री मालिक की मौत भी हो गई थी। फैक्ट्री में काम करने वाली महिला मजदूर थी। वहीं, 20 अक्टूबर 2022 को मुरैना स्थित एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ था। इस हादसे में चार लोगों की मौत और सात लोग घायल हुए थे। इस हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हुई थी। ब्लास्ट में पूरा घर जमींदोज हो गया था। एमपी के शिवपुरी जिले में 13 अप्रैल 2022 को भी अवैध पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ था। इसमें चार लोगों की मौत और छह लोग घायल हुए थे। घटना बदरवास की थी। मृतकों में दो बच्चे थे। चार नवंबर को 2020 को मुरैना जिले के जिगनी गांव में ब्लास्ट हुआ था। इसमें पति-पत्नी और बच्चे की मौत हो गई थी। पटाखा बनाने के लिए बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा था। ब्लास्ट के बाद मृतक का मकान गिर गया था। 25 अक्टूबर 2019 को ग्वालियर के एक गांव में अवैध रूप से रखे विस्फोटक में ब्लास्ट हुआ था। इसमें तीन की मौत और 5 लोग घायल हुए थे। जांच में यह बात सामने आई थी कि अवैध रूप से पटाखा का निर्माण हो रहा था। सात जून 2017 को बालाघाट स्थित पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ था। इसमें 25 लोगों की मौत हुई थी। बताया जा रहा है कि बीड़ी से निकली चिंगारी के बाद फैक्ट्री में आग पकड़ी थी। 11 अप्रैल 2017 को छिंदवाड़ा अवैध फैक्ट्री के अंदर ब्लास्ट हुआ था। इसमें 13 लोगों की मौत हुई थी। मरने वालों में पांच महिलाएं थीं, जो जिंदा जल गईं। यह आग एक राशन शॉप में रखे किरोसिन की वजह से भड़की थी। 19 अप्रैल 2017 को इंदौर एक पटाखा दुकान में ब्लास्ट के बाद सात लोगों की मौत हुई थी। पांच अप्रैल 2017 को दतिया में एक ब्लास्ट के बाद परिवार के छह लोगों की मौत हो गई थी। यह घटना एलपीजी सिलेंडर में ब्लास्ट के बाद घटी थी। ब्लास्ट इतना बड़ा था कि घर में छह फीट गहरा गड्ढा हो गया था। 13 मई 2015 को मध्य प्रदेश के बालाघाट स्थित अवैध पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ था। इसमें 3 लोगों की मौत हुई थी। साथ ही 15 घरों में आग लग गई थी। 12 सितंबर 2015 को झाबुआ जिले के पेटलावाद में बड़ा विस्फोट हुआ था। इसमें सरकारी आंकड़े के अनुसार 78 लोगों की मौत हुई थी। स्थानीय लोग और ज्यादा बताते हैं। यहां अवैध तरीके से घर में विस्फोटक को स्टोर कर रखा गया था। एलपीजी सिलेंडर में आग लगने के बाद यह धमाका हुआ था। यह ब्लास्ट इतना जोरदार था कि बस स्टैंड के पास खड़े लोगों की मौत भी हो गई थी। Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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