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: Gwalior: भयंकर सर्दी पड़े फिर भी 'अलाव' नहीं जला सकते, वजह जानना आपके लिए जरूरी

News Desk / Fri, Dec 2, 2022


प्रदूषण को लेकर सख्त निगम

प्रदूषण को लेकर सख्त निगम - फोटो : अमर उजाला

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ग्वालियर जिले में इस समय शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यही कारण है कि अब सर्दी से बचने के लिए शहर भर में जो लकड़ी के अलाव जलाए जाते हैं, उन पर पाबंदियां लगाई जाएं। सर्दी में अलाव पर पाबंदी से सबसे ज्यादा असर उन फुटपाथियों पर होगा, जो शहर के किनारे अपना जीवन यापन करते हैं और रात भर ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेते हैं।

बता दें, इस समय ग्वालियर में लगातार वायु प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। वर्तमान में एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 के पार हो चुका है। ऐसे में लकड़ी से अलाव जलाने पर स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए प्रदूषण बोर्ड ने आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि लगातार अंचल में भर्ती सर्दी को देखकर नगर निगम ने 50 स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की है। नगर निगम कमिश्नर किशोर कन्याल का कहना है, अंचल में कड़ाके की सर्दी पड़ती है और ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी रेलवे स्टेशन बस स्टैंड के यात्रियों को होती है तो वहीं सैकड़ों की संख्या में फुटपाथी अलाव का सहारा लेकर अपनी रात गुजारते हैं। लेकिन लगातार बढ़ते प्रदूषण को देखकर अब ठंड से बचने के लिए रैन बसेरा में गैस के हीटर लगाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

जीवाजी विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष ने क्या कहा...
वहीं, जीवाजी विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉक्टर हरेंद्र शर्मा का कहना है कि इस समय ग्वालियर में वायु प्रदूषण लगातार तेजी से बढ़ रहा है। कुछ इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से अधिक पहुंच गया है। जो बेहद ही खतरनाक है, ऐसे में सर्दी लगातार बढ़ रही है और अगर शहर में लकड़ी के अलाव जलाए जाएंगे तो प्रदूषण का स्तर काफी भयावह हो सकता है, जिन लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।

विस्तार

ग्वालियर जिले में इस समय शहर में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यही कारण है कि अब सर्दी से बचने के लिए शहर भर में जो लकड़ी के अलाव जलाए जाते हैं, उन पर पाबंदियां लगाई जाएं। सर्दी में अलाव पर पाबंदी से सबसे ज्यादा असर उन फुटपाथियों पर होगा, जो शहर के किनारे अपना जीवन यापन करते हैं और रात भर ठंड से बचने के लिए अलाव का सहारा लेते हैं।

बता दें, इस समय ग्वालियर में लगातार वायु प्रदूषण तेजी से फैल रहा है। वर्तमान में एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 के पार हो चुका है। ऐसे में लकड़ी से अलाव जलाने पर स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए प्रदूषण बोर्ड ने आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि लगातार अंचल में भर्ती सर्दी को देखकर नगर निगम ने 50 स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की है। नगर निगम कमिश्नर किशोर कन्याल का कहना है, अंचल में कड़ाके की सर्दी पड़ती है और ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी रेलवे स्टेशन बस स्टैंड के यात्रियों को होती है तो वहीं सैकड़ों की संख्या में फुटपाथी अलाव का सहारा लेकर अपनी रात गुजारते हैं। लेकिन लगातार बढ़ते प्रदूषण को देखकर अब ठंड से बचने के लिए रैन बसेरा में गैस के हीटर लगाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

जीवाजी विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष ने क्या कहा...
वहीं, जीवाजी विश्वविद्यालय में वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉक्टर हरेंद्र शर्मा का कहना है कि इस समय ग्वालियर में वायु प्रदूषण लगातार तेजी से बढ़ रहा है। कुछ इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 से अधिक पहुंच गया है। जो बेहद ही खतरनाक है, ऐसे में सर्दी लगातार बढ़ रही है और अगर शहर में लकड़ी के अलाव जलाए जाएंगे तो प्रदूषण का स्तर काफी भयावह हो सकता है, जिन लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।


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