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: Kuno National Park: सतपुड़ा रिजर्व से आए हाथी करेंगे विदेशी मेहमानों की सुरक्षा, स्पेशल ट्रेनिंग से लैस हैं

News Desk / Tue, Sep 20, 2022


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मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से आए विदेशी मेहमानों में पूरी दुनिया की रुचि है। वह क्या खा रहे हैं, कैसा व्यवहार कर रहे हैं, इस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए दो हाथी- सिद्धनाथ और लक्ष्मी को सौंपी गई है। यह दोनों ही हाथी विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन 17 सितंबर को नामीबिया से आए पांच मादा और तीन नर चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ा था। इन चीतों की सुरक्षा बेहद अहम है। एक तो यहां का माहौल उनके लिए नया है और दूसरा अन्य जानवरों के लिए चीते नए हैं। ऐसे में चीतों की अन्य हिंसक जानवरों से सुरक्षा करना भी इस प्रोजेक्ट चीता का बेहद महत्वपूर्ण लक्ष्य है। 

एक महीने पहले आए थे दोनों हाथी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सतपुड़ा रिजर्व से 41 वर्षीय सिद्धनाथ व 10 वर्षीय लक्ष्मी को एक महीने पहले कूनो लाया गया था। उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर इस पार्क में तैनात किया गया है। दोनों हाथी चीतों की निगरानी में वनकर्मियों की मदद करने के साथ ही अन्य जानवरों को भटकने से रोकेंगे। इन दोनों ही हाथियों को हिंसक जानवरों को काबू करने, गश्त करने या बचाव अभियान का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इन्हीं खूबियों को देखते हुए इन्हें कूनो लाया गया है। इनकी तैनाती भी विशेष बाड़े के पास की गई है। 

शिवपुरी और बारां की सीमा पर निगरानी चौकी
कूनो नेशनल पार्क मध्यप्रदेश के शिवपुरी और राजस्थान के बारां जिले से सटा हुआ है। राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व, रणथंबौर टाइगर रिजर्व तक कॉरिडोर भी बनाता है। इस वजह से चीतों को कूनो में ही रोके रखने के लिए विशेष निगरानी चौकियां बनाई गई हैं। रेडियो कॉलर लगे चीतों से हर चार घंटे में लोकेशन ली जाएगी। जब भी उनके पार्क से बाहर निकलने की सूचना मिलेगी, इन चौकियों को अलर्ट किया जाएगा।

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मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से आए विदेशी मेहमानों में पूरी दुनिया की रुचि है। वह क्या खा रहे हैं, कैसा व्यवहार कर रहे हैं, इस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाए गए दो हाथी- सिद्धनाथ और लक्ष्मी को सौंपी गई है। यह दोनों ही हाथी विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन 17 सितंबर को नामीबिया से आए पांच मादा और तीन नर चीतों को क्वारंटाइन बाड़ों में छोड़ा था। इन चीतों की सुरक्षा बेहद अहम है। एक तो यहां का माहौल उनके लिए नया है और दूसरा अन्य जानवरों के लिए चीते नए हैं। ऐसे में चीतों की अन्य हिंसक जानवरों से सुरक्षा करना भी इस प्रोजेक्ट चीता का बेहद महत्वपूर्ण लक्ष्य है। 

एक महीने पहले आए थे दोनों हाथी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सतपुड़ा रिजर्व से 41 वर्षीय सिद्धनाथ व 10 वर्षीय लक्ष्मी को एक महीने पहले कूनो लाया गया था। उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर इस पार्क में तैनात किया गया है। दोनों हाथी चीतों की निगरानी में वनकर्मियों की मदद करने के साथ ही अन्य जानवरों को भटकने से रोकेंगे। इन दोनों ही हाथियों को हिंसक जानवरों को काबू करने, गश्त करने या बचाव अभियान का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। इन्हीं खूबियों को देखते हुए इन्हें कूनो लाया गया है। इनकी तैनाती भी विशेष बाड़े के पास की गई है। 

शिवपुरी और बारां की सीमा पर निगरानी चौकी
कूनो नेशनल पार्क मध्यप्रदेश के शिवपुरी और राजस्थान के बारां जिले से सटा हुआ है। राजस्थान के मुकुंदरा हिल टाइगर रिजर्व, रणथंबौर टाइगर रिजर्व तक कॉरिडोर भी बनाता है। इस वजह से चीतों को कूनो में ही रोके रखने के लिए विशेष निगरानी चौकियां बनाई गई हैं। रेडियो कॉलर लगे चीतों से हर चार घंटे में लोकेशन ली जाएगी। जब भी उनके पार्क से बाहर निकलने की सूचना मिलेगी, इन चौकियों को अलर्ट किया जाएगा।


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