बता दें कि 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर नामीबिया से भारत लाए गए आठ चीतों को मप्र के श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया है। रविवार को पीएम मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में लोगों से चीतों और योजना के नाम देने की अपील की थी। उन्होंने लोगों से MyGov प्लेटफॉर्म पर होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए कहा था। प्रतियोगिता में जीतने वाले प्रतिभागियों को कूनो नेशनल पार्क में चीतों को देखने का मौका मिलेगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर है।
: Kuno National Park: चीतों के लिए मिल्खा, चेतक, वायु जैसे नामों के सुझाव, 750 से ज्यादा नाम आए
News Desk / Tue, Sep 27, 2022
MyGov प्लेटफॉर्म पर चीतों के लिए अब तक 750 से अधिक लोगों ने वीर, पनकी, भैरव, ब्रह्मा, रुद्र, दुर्गा, गौरी, भाद्र, शक्ति, बृहस्पति, चतुर, वीरा, रक्षा, मेधा और मयूर जैसे नामों का सुझाव हैं। वहीं अभियान के लिए 800 से अधिक लोगों ने 'कूनो का कुंदन', 'मिशन चित्रक', 'चिरायु' और 'चितवाल' जैसे शीर्षक सुझाए हैं। बता दें कि नामीबिया से आए चीतों में से एक का नामकरण स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। इन सभी चीतों के नाम हैं- आशा, सियाया, ओबान, सिबिली, सियासा, सवाना, साशा और फ्रेडी।
1948 में आखिरी बार देखा गया था चीता
भारत में आखिरी बार चीता 1948 में देखा गया था। इसी वर्ष कोरिया राजा रामनुज सिंहदेव ने तीन चीतों का शिकार किया था। इसके बाद भारत में चीतों को नहीं देखा गया। इसके बाद 1952 में भारत में चीता प्रजाति की भारत में समाप्ति मानी गई। कूनो नेशनल पार्क में चीते को बसाने के लिए 25 गांवों के ग्रामीणों और 5 तेंदुए को अपना 'घर' छोड़ना पड़ा है. इन 25 में से 24 गांव के ग्रामीणों को दूसरी जगह बसाया जा चुका है।
1970 में एशियन चीते लाने की हुई कोशिश
भारत सरकार ने 1970 में एशियन चीतों को ईरान से लाने का प्रयास किया गया था। इसके लिए ईरान की सरकार से बातचीत भी की गई, लेकिन यह पहल सफल नहीं हो सकी। केंद्र सरकार की वर्तमान योजना के अनुसार पांच साल में 50 चीते लाए जाएंगे।
Source link
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन