: MP News: झाबुआ एसपी के सस्पेंड होते ही 24 घंटे के अंदर कलेक्टर भी नप गए, ये है इनसाइड स्टोरी
News Desk / Mon, Sep 19, 2022
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मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पुलिस अधीक्षक अरविंद तिवारी को सस्पेंड करने के बाद कलेक्टर सोमेश मिश्रा को भी 24 घंटे में हटा दिया गया। तिवारी को पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों से अशोभनीय बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद संस्पेड कर दिया गया। वहीं, कलेक्टर सोमेश मिश्रा को भ्रष्टाचार की शिकायतों को लेकर हटाने की बात कही जा रही है।दरअसल, भ्रष्टाचार और अधिकारियों के वीडियो पहले भी आते रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज की त्वरित एक्शन के पीछे आदिवासी वोट बैंक को माना जा रहा है। मुख्यमंत्री 2018 की गलती दोबारा नहीं दोहराना चाहते हैं। आदिवासी वोटरों ने बीजेपी की सरकार को सड़क पर ला दिया। अब शिवराज आदिवासी वर्ग को नाराज करने का कोई रिस्क नहीं लेना चाहते।
सोमवार को एसपी अरविंद तिवारी को सस्पेंड करने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान नगरीय निकाय चुनाव के प्रचार के लिए झाबुआ के पटेलावाद पहुंचे। यहां पर उन्होंने कहा कि जनता को परेशान करने वाले किसी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी जनता से सीधे मुंह बात नहीं करेगा तो उसको छोड़ा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री आदिवासी वर्ग को संदेश देना चाहते है कि सरकार आपके साथ है।
आदिवासी को लुभाने लगातार कार्यक्रम
प्रदेश में आदिवासी को लुभाने के लिए बीजेपी सरकार लगातार कार्यक्रम कर रही है। सितंबर 2021 में अमित शाह ने जबलपुर में राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद नवंबर 2021 में भोपाल में जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में शामिल होने आए। यहां उन्होंने हबीबगंज रेलवे स्टेशन नाम गौंड रानी कमलापति के नाम पर किया। इसके बाद अप्रैल 2022 में गृहमंत्री तेंदूपत्ता संग्राहकों के कार्यक्रम में शामिल होने आए और आदिवासियों को कई सौगातें दी।
जनता को परेशान किया तो नहीं छोडूंगा
प्रदेश में 18 जिलों में झाबुआ की नगर परिषद थांदला, पेटलावद, रानापुर, नगर पालिका परिषद झाबुआ में 27 सितंबर को चुनाव है। सोमवार को सीएम एसपी अरविंद तिवारी को संस्पेड करने के बाद पेटलावाद पहुंचे। यहां पर सीएम ने कहा कि जनता को परेशान करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि एसपी ने छात्रों से अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया मैंने तत्काल संस्पेड कर दिया।
इसलिए आदिवासी वोट जरूरी
प्रदेश में 2008 में बीजेपी को आदिवासी वर्ग की 47 में से 31 सीटें मिली, 2013 में 47 में से 31 सीटें बीजेपी दोबारा जीती। लेकिन 2018 में आदिवासी वोटर कांग्रेस की तरफ चला गया। इसके कारण बीजेपी को 47 में से सिर्फ 16 सीटें ही मिली। यही वजह रही है कि बीजेपी की सत्ता चली गई और कांग्रेस ने सरकार बनाई।
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