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: MP News: राजगढ़ में दो नाबालिगों का हो रहा था विवाह, प्रशासन ने दबिश दी तो बरात आधे रास्ते से ही पलट गई

News Desk / Thu, Nov 24, 2022


राजगढ़ में दो नाबालिग लड़कियों का बाल विवाह रोका गया।

राजगढ़ में दो नाबालिग लड़कियों का बाल विवाह रोका गया। - फोटो : अमर उजाला

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मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में दो नाबालिग बच्चियों का विवाह हो रहा था। यह जानकारी प्रशासन को लगी तो टीम सक्रिय हुई। दबिश दी गई। जब छापे की जानकारी दूल्हा पक्ष को लगी तो उन्होंने आधे रास्ते से ही बरात पलटा ली। 

मामला ग्राम बघेला का है। कलेक्टर हर्ष दीक्षित को पता चला था कि बघेला गांव में दो नाबालिग बच्चियों की शादी हो रही हैं। बरात आने से पहले ही कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, महिला एवं बाल विकास अधिकारी और स्थानीय टीआई अपनी-अपनी टीमों को लेकर मौके पर पहुंच गए। दोनों दुल्हनों के रिश्तेदार सेदरा सेदरी गांव से आ रही बरात के स्वागत की तैयारियों में जुटे थे। प्रशासनिक टीम ने बच्चियों के आधार कार्ड मंगवाए। जब परिजनों ने आधार पेश नहीं किए तो शक हुआ। कुछ देर तक तो लड़कियों की उम्र छिपाने की कोशिश होती रही।  

अधिकारियों की समझाइश पर माने परिजन
जब अधिकारियों ने समझाइश दी तो लड़कियों के परिजनों ने स्वीकार किया कि दोनों नाबालिग हैं। इसके बाद दूल्हे पक्ष को सूचना दी गई। दोनों ही लड़कियों के होने वाले दूल्हों ने बरात पलटा ली और शादी स्थल पर आए ही नहीं। 

पंडित से लेकर रिश्तेदारों तक, सबको होती जेल
खिलचीपुर तहसीलदार आरएल बागरी ने बताया कि एक लड़की की उम्र 15 और दूसरी की 17 साल थी। इस विवाह को रुकवाया गया। साथ ही माता-पिता को बाल विवाह नहीं करने की समझाइश दी गई। लड़की के पिता ने माना कि वह लोग गलती कर रहे थे। शादी लड़कियों के 18 साल के होने पर ही की जाएगी। यदि यह शादी हो जाती तो न केवल दुल्हन और दूल्हे के माता-पिता, बल्कि रिश्तेदार, टेंट वाले, पंडित और रसोई बनाने वालों पर भी एफआईआर होती और सबको जेल जाना होता। 
 

विस्तार

मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में दो नाबालिग बच्चियों का विवाह हो रहा था। यह जानकारी प्रशासन को लगी तो टीम सक्रिय हुई। दबिश दी गई। जब छापे की जानकारी दूल्हा पक्ष को लगी तो उन्होंने आधे रास्ते से ही बरात पलटा ली। 

मामला ग्राम बघेला का है। कलेक्टर हर्ष दीक्षित को पता चला था कि बघेला गांव में दो नाबालिग बच्चियों की शादी हो रही हैं। बरात आने से पहले ही कलेक्टर के निर्देश पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार, महिला एवं बाल विकास अधिकारी और स्थानीय टीआई अपनी-अपनी टीमों को लेकर मौके पर पहुंच गए। दोनों दुल्हनों के रिश्तेदार सेदरा सेदरी गांव से आ रही बरात के स्वागत की तैयारियों में जुटे थे। प्रशासनिक टीम ने बच्चियों के आधार कार्ड मंगवाए। जब परिजनों ने आधार पेश नहीं किए तो शक हुआ। कुछ देर तक तो लड़कियों की उम्र छिपाने की कोशिश होती रही।  

अधिकारियों की समझाइश पर माने परिजन
जब अधिकारियों ने समझाइश दी तो लड़कियों के परिजनों ने स्वीकार किया कि दोनों नाबालिग हैं। इसके बाद दूल्हे पक्ष को सूचना दी गई। दोनों ही लड़कियों के होने वाले दूल्हों ने बरात पलटा ली और शादी स्थल पर आए ही नहीं। 

पंडित से लेकर रिश्तेदारों तक, सबको होती जेल
खिलचीपुर तहसीलदार आरएल बागरी ने बताया कि एक लड़की की उम्र 15 और दूसरी की 17 साल थी। इस विवाह को रुकवाया गया। साथ ही माता-पिता को बाल विवाह नहीं करने की समझाइश दी गई। लड़की के पिता ने माना कि वह लोग गलती कर रहे थे। शादी लड़कियों के 18 साल के होने पर ही की जाएगी। यदि यह शादी हो जाती तो न केवल दुल्हन और दूल्हे के माता-पिता, बल्कि रिश्तेदार, टेंट वाले, पंडित और रसोई बनाने वालों पर भी एफआईआर होती और सबको जेल जाना होता। 

 

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