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: MP OBC Reservation: सुनवाई में नया मोड़, SC में लंबित मामलों की स्टेटस रिपोर्ट सरकार पेश करे

News Desk / Mon, Sep 5, 2022


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मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी किए जाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को नया पेंच फंस गया। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू और जस्टिस वीरेद्र सिंह की युगलपीठ को बताया गया कि हाईकोर्ट पूर्व में ओबीसी आरक्षण को 27 फीसदी किए जाने के आदेश को खारिज कर चुका है, जिसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में तीन याचिकाएं लंबित हैं। हाईकोर्ट के बेंच ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओँ की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

बताते चलें, मध्यप्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण किए जाने के खिलाफ और पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाओं की अंतिम सुनवाई के दौरान विपक्ष में दायर की गई याचिकाओं पर पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। मौजूदा समय में आरक्षण के समर्थन में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया, साल 2003 में शासन ने ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी करने के आदेश जारी किये थे। इस संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2014 में ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी किए जाने के आदेश को खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में तीन याचिकाएं दायर की गई थीं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, अनुपालन में प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किया है। सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिका का विवरण भी पेश किया गया था, जिस पर युगलपीठ ने सर्च करने पर पाया कि वे सभी याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं।

युगलपीठ ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के संबंध में पेपर बुक के साथ स्टेटस रिपोर्ट पेश करे, जिसके बाद ओबीसी आरक्षण मामले में अगली सुनवाई 13 सितम्बर को निर्धारित की गई है। कोर्ट में सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता आषीश बर्नाड और विषेष अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह उपस्थित हुए थे। 

विस्तार

मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी किए जाने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मंगलवार को नया पेंच फंस गया। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू और जस्टिस वीरेद्र सिंह की युगलपीठ को बताया गया कि हाईकोर्ट पूर्व में ओबीसी आरक्षण को 27 फीसदी किए जाने के आदेश को खारिज कर चुका है, जिसके खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में तीन याचिकाएं लंबित हैं। हाईकोर्ट के बेंच ने राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओँ की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

बताते चलें, मध्यप्रदेश में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण किए जाने के खिलाफ और पक्ष में 64 याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिकाओं की अंतिम सुनवाई के दौरान विपक्ष में दायर की गई याचिकाओं पर पक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। मौजूदा समय में आरक्षण के समर्थन में दायर याचिका पर पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया, साल 2003 में शासन ने ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी करने के आदेश जारी किये थे। इस संबंध में दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2014 में ओबीसी आरक्षण 27 फीसदी किए जाने के आदेश को खारिज कर दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय में तीन याचिकाएं दायर की गई थीं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, अनुपालन में प्रदेश सरकार ने ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किया है। सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिका का विवरण भी पेश किया गया था, जिस पर युगलपीठ ने सर्च करने पर पाया कि वे सभी याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय में लंबित हैं।

युगलपीठ ने सुनवाई के बाद राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के संबंध में पेपर बुक के साथ स्टेटस रिपोर्ट पेश करे, जिसके बाद ओबीसी आरक्षण मामले में अगली सुनवाई 13 सितम्बर को निर्धारित की गई है। कोर्ट में सरकार की तरफ से अतिरिक्त महाधिवक्ता आषीश बर्नाड और विषेष अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह उपस्थित हुए थे। 


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