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: Navratri 2022: यहां 400 वर्षों से विराजमान हैं हजारी परिवार की कुल देवी, कानपुर से लाई गई थी प्रतिमा

News Desk / Tue, Sep 27, 2022


मध्यप्रदेश के कई शहरों में मां दुर्गा के प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिर हैं, जहां नवरात्र के दिनों में बड़ी संख्या में भक्त माता के चरणों में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं। दमोह जिले में एक ऐसा ही अति प्रचीन मंदिर है जहां नवरात्रि के दिनों में लोग बड़ी देवी के दर्शन करने पहुंचते हैं। मंदिर में स्थापित बड़ी देवी को प्रतिमा को करीब 400 साल पुराना बताया जाता है। बड़ी देवी को हजारी परिवार की कुलदेवी माना जाता है। दमोह में इस मंदिर की बहुत आस्था है। नवरात्रि के दिनों में बड़ी संख्या में लोग यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। साल भर यहां भक्तों का तांता लगा रहता है।

कानपुर से लाई गई थी प्रतिमा
जानकारों के अनुसार मां बड़ी देवी की प्रतिमा अति प्राचीन है। करीब चार सौ वर्ष पहले बड़ी देवी मंदिर में देवीजी की स्थापना की गई थी। इसके बाद से अब दूसरी बार मंदिरों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। जिसके लिए भक्तगण बढ़ चढ़कर उत्साह दिखा रहे हैं। दमोह के बड़ी देवी मंदिर का इतिहास बताता है कि करीब चार सौ वर्ष पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के कटहरा गांव से हजारी परिवार दमोह पहुंचा था। परिवार अपनी कुलदेवी मां महालक्ष्मी की मूर्ति लेकर दमोह पहुंचा था। माता की इस मूर्ति की स्थापना फुटेरा तालाब के पास स्थित उनकी ही जमीन पर की गई। इसके साथ ही मां सरस्वती और मां महाकाली की मूर्तियां भी स्थापित की गई थीं।
 

मां बड़ी देवी के रूप में मिली पहचान
लोग यहां बड़ी देवी के चमत्कारों को जिक्र करते हैं। कहा जाता है कि चमत्कारों को कारण ही अब मां बड़ी देवी के नाम से प्रसिद्ध हो गई हैं। दमोह के फुटेरा वॉर्ड स्थित बड़ी देवी मंदिर में मूर्तियों की स्थापना होने के बाद से लेकर लगातार यहां भक्तों क आने का सिलसिला शुरू है। हजारी परिवार की कुलदेवी के सामने जिस किसी ने भी अपनी कामना रखी। उसकी इच्छा पूरी जरूर हुई है। कुछ ही समय में लोग हजारी परिवार की कुलदेवी को बड़ी देवी कहने लगे और लोग इस मंदिर को बड़ी देवी के मंदिर के नाम से जानने लगे। जो अब जिले के साथ प्रदेश भर में  बड़ी देवी के नाम से प्रचलित है। पूर्व में बड़ी खेरमाई और बगीचा वाली माई के नाम से भी लोग यहां माता के दर्शन करने पहुंचते थे। दोनों नवरात्र में यहां 9 दिनों तक अखंड पाठ चलता है।

मंदिरा का जीर्णोद्धार जारी
मंदिर के पुजारी पंडित आशीष कटारे ने बताया कि उनके पूर्वजों ने करीब दो सौ वर्ष पूर्व छपरट वाले ठाकुर साहब ने मनोकामना पूरी होने पर बड़ी देवी मंदिर बनाने का प्रयास किया था, लेकिन गुबंद क्षतिग्रस्त होने के बाद काम रोक दिया गया था। इसके बाद 1979 में शहर के बाबूलाल गुप्ता ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। अब नया रूप मंदिर को दिया जा रहा है। जिसके लिए लोग खुलकर दान कर रहे है और खंडपीठ के रूप में मंदिर का निर्माण चल रहा है जो अंतिम दौर में है। मंदिर में देवी प्रतिमा के अलावा स्फटिक के शिवलिंग की भी स्थापना की गई है।


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