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: Navratri 2022: यहां विराजी हैं राजसत्ता की देवी, चीन युद्ध विराम के लिए पूर्व पीएम नेहरू ने किया था महायज्ञ

News Desk / Mon, Sep 26, 2022


मध्यप्रदेश में कई प्रसिद्ध शक्तिपीठ हैं। दतिया जिले में स्थित मां पीतांबरा के मंदिर की ख्याति देश-विदेश तक फैली है। यह मंदिर देश के शक्तिपीठों में शुमार है। इस मंदिर में राजाशाही से लेकर, नौकरशाह तक देवी की आराधना करने यहां आते हैं। देवी पीतांबरा को राजसत्ता की देवी माना जाता है। राजसत्ता की कामना रखने वाले भक्त यहां आकर गुप्त पूजा अर्चना करते हैं। मां पीतांबरा शत्रु नाश की अधिष्ठात्री देवी है और राजसत्ता प्राप्ति में देवी पीतांबरा की पूजा का विशेष महत्व है।
 

पीतांबरा शक्तिपीठ में मां बगलामुखी का रूप रक्षात्मक है। 1962 में चीन ने जब भारत पर आक्रमण किया था तब तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने मंदिर में देश की रक्षा के लिए 51 कुंडीय महायज्ञ किया था और देश की रक्षा के मां पीतांबरा से प्रार्थना की थी। इसमें कई अफसरों और फौजियों ने आहुति डाली। 11वें दिन अंतिम आहुति डालते ही चीन ने बार्डर से अपनी सेनाएं वापस बुला लीं। उस समय बनाई गई यज्ञशाला पीठ में आज भी मौजूद है। उसके बाद जब भी देश के ऊपर संकट आया है, तब गोपनीय रूप में पीतांबरा पीठ में साधना व यज्ञ का आयोजन होता है। केवल भारत-चीन युद्ध ही नहीं, बल्कि 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भी दतिया के शक्तिपीठ में विशेष अनुष्ठान किया गया था। कारगिल युद्ध के समय भी अटल बिहारी वाजपेयी की ओर पीठ में एक यज्ञ का आयोजन किया गया और आहुति के अंतिम दिन पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा।

कई मंत्री आ चुके हैं पीतांबरा धाम
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर राजमाता विजयाराजे सिंधिया इस मंदिर में दर्शन के लिए आ चुकी हैं। पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, राजस्थान की पूर्व सीएम वंसुधरा राजे सिंधिया भी पीतांबरा धाम में पूजा अर्चना करने आ चुकी हैं। मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान, पूर्व सीएम उमा भारती, दिग्विजय सिंह, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी यहां अनुष्ठान कर चुके हैं।
 

छोटी से खिड़की से होते हैं दर्शन
पीतंबरा सिद्धपीठ की स्थापना 1935 में की गई थी। भक्तों को माता के दर्शन एक छोटी सी खिड़की से होते हैं। मंदिर प्रांगण में स्थित वनखंडेश्वर महादेव शिवलिंग को महाभारत काल का बताया जाता है। कहा जाता है कि मां पीतांबरा दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं। मां के दशर्न से सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।

पीताम्बरा पीठ में केवल देश से ही नहीं, बल्कि विदेशों  से भी लोग अनुष्ठान कराने आते हैं। मान्यता है कि किसी भी प्रकार का कष्ट हो यदि मां पीताम्बरा का अनुष्ठान किया जाए तो सभी प्रकार की समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। कहा जाता है कि कभी इस स्थान पर श्मशान हुआ करता था, लेकिन आज एक विश्वप्रसिद्ध मंदिर है। लोगों की मान्यता है कि मुकदमे आदि के सिलसिले में मां पीताम्बरा का अनुष्ठान सफलता दिलाने वाला होता है। पीताम्बरा पीठ के प्रांगण में ही 'मां धूमावती देवी' का मंदिर है, जो भारत में केवल एक ही है। यही कारण है कि नवरात्रि के साथ पूरे वर्ष भर पीताम्बरा पीठ में राजनेताओं से लेकर फिल्म अभिनेता आकर अनुष्ठान करते हैं।
 


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