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: Rewa Accident: भीषण बस हादसे में बचे लोगों ने बताई उस रात की कंपा देने वाली कहानी, जानें दर्द भरी दास्तां

News Desk / Fri, Oct 21, 2022


सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत

सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत - फोटो : सोशल मीडिया

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मध्यप्रदेश के रीवा में हुए सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई है। आठ लोग अब भी जिंदगी से जंग लड़ रहे हैं। हृदय विदारक समाचार पढ़कर हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं कि हादसे की पीड़ा क्या रही होगी। हादसे में बचे लोगों की जुबां से जब पता चलता है कि क्या मंजर रहा होगा वो। हमने ऐसे ही कुछ लोगों से बात की, जिन्होंने घटना का आंखों देखा हाल बयां किया।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में रहने वाले सत्येंद्र प्रसाद उनमें से एक हैं। वे हैदराबाद में रहकर काम करते हैं। वे अपने चचेरे भाई और साथ काम करने वाले सात-आठ लोगों के साथ हैदराबाद से गोरखपुर जाने के लिए बस में बैठे थे। तीन दिन पहले शाम छह बजे बस हैदराबाद से निकली थी। सत्येंद्र ने बताया, हम वहां एक कंपनी में काम करते हैं। मैं और मेरा छोटा चचेरा भाई रघुवीर हैदराबाद से बस में बैठे थे। हमारे साथ काम करने वाले आठ लोग थे। जबलपुर में बस बदली थी, गोरखपुर जा रहे थे।

बस में भीड़ बहुत थी। हम सबसे पीछे ऊपर वाली सीट पर बैठे थे। बस के कैबिन में 12-15 लोग होंगे। हम लोग जाग रहे थे, बातें कर रहे थे। तभी जोरदार झटका लगा और तेज आवाज आई। हम लोग भी बुरी तरह कैबिन में ही एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। पता चल गया था कि कोई एक्सीडेंट हो गया है। चंद सेकेंड बाद ही चीखे सुनाई देने लगीं। हम लोगों ने निकलने की कोशिश की पर बस की स्थिति ऐसी नहीं थी, दरवाजे तक भी पहुंचा जा सके। हमने खिड़की तोड़ी और बाहर निकले। 

पीछे बैठे हम आठ-दस लोग ही थे, जो चलने-फिरने की स्थिति में थे। हमने पहले खुद को संभाला फिर बस की स्थिति देखी। बस 42 पहियों वाले बड़े ट्रॉले से पीछे से टकराई थी। बस के आगे का हिस्सा पूरी तरह टूट गया था। ड्राइवर के पीछे वाला कैबिन भी टूट गया था। बस की सभी सीटें निकल चुकी थी। हर तरफ खून और चीखें थीं। लग रहा था कि बस के आगे वाले हिस्से में बैठे किसी का भी बचना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।

फिर पुलिस और एंबलेंस आ गई, हमने मिलकर लोगों को निकाला। सत्येंद्र बताते हैं कि इतना खून देखकर मैं बुरी तरह डर गया था। फिर मुझे भी चक्कर आ गए। सड़क किनारे लेटा रहा। मुझे भी अस्पताल ले जाया गया। मेरी रीढ़ की हड्डी में चोट है पर घरवाले परेशान हो रहे हैं, इसलिए मैं यहां नहीं रुकना चाहता। दूसरी बस से घर पहुंचना चाहता हूं बस। बता दें कि सत्येंद्र गोरखपुर जिले के पिपराई थाना क्षेत्र के ग्राम टिपरही में रहते हैं।

क्या बताया सुभाष चौधर ने...
तीस साल के मजदूर सुभाष चौधरी गहरी नींद में थे और दिवाली का सपना देख रहे थे, जिसके लिए वह उत्तर प्रदेश में बस से घर जा रहे थे। लेकिन एक तेज गड़गड़ाहट ने उनकी नींद तोड़ दी और उनका सपना जल्द ही एक दुःस्वप्न में बदल गया। क्योंकि उन्होंने देखा कि लोग दर्द से कराह रहे हैं और अपने चारों ओर खून से लथपथ पड़े हैं।

चौधरी उन यात्रियों में से एक हैं, जो मध्यप्रदेश के रीवा जिले में शुक्रवार देर रात स्लीपर बस में पीछे से एक ट्रेलर-ट्रक से जा टकराई, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और 40 घायल हो गए। हालांकि, चौधरी दुर्घटना में बाल-बाल बचे, लेकिन उनके हाथ और पैर में चोटें आईं। वह अपने प्रियजनों के साथ दिवाली मनाने के लिए हैदराबाद से उत्तर प्रदेश के अपने गृहनगर महाराजगंज जा रहे थे। लेकिन हादसे ने उनका सपना तोड़ दिया, क्योंकि उनका अब रीवा के संजय गांधी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

उन्होंने बताया, मैं गहरी नींद में सो रहा था और अपने सपने में दिवाली मना रहा था। क्योंकि रोशनी का त्योहार सिर्फ तीन दिन है। मैं साथी यात्रियों के साथ रात का खाना खाकर सो गया था। लेकिन मैं जोर से जाग गया और देखा कि कोई कह रहा भगवान मुझे बचाओ, भगवान मेरी मदद करो, बस में ऐसी ही आवाजें गूंजती रहीं। मैं दर्द से कराह रहा था और मेरे जैसे कई अन्य लोग थे। मैंने बस के अंदर खून से लथपथ असहाय लोगों को देखा। उनमें से कुछ जवाब नहीं दे रहे थे, जबकि कुछ अन्य सांस के लिए हांफ रहे थे। उन्होंने कहा, घर लौटने और त्योहार मनाने का हमारा सपना राख हो गया।

मनीष सकात ने क्या बताया...
मनीष सकात (21) भी महाराजगंज के निवासी हैं, उनके सिर और छाती पर चोट लगी है। धीमी आवाज में बोलते हुए उन्होंने कहा, बस दुर्घटना की गगनभेदी आवाज और इसके तुरंत बाद रोने की आवाज ने उन्हें भयभीत कर दिया। उन्हें अपनी आंखें बंद करने के लिए मजबूर कर दिया। न्होंने पीटीआई से कहा, मैं इतना डरा हुआ था कि मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं। उसके बाद मुझे नहीं पता कि क्या हुआ। कुछ समय बाद मुझे होश आया और मैंने खुद को संजय गांधी अस्पताल में पाया।

रीवा के पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन ने कहा, दुर्घटना में 15 लोगों की मौत हो गई और 40 घायल हुए हैं। पीड़ित ज्यादातर मजदूर थे, जो दिवाली के लिए यूपी लौट रहे थे। बस भी उसी राज्य की थी। भसीन ने बताया, बस के अगले हिस्से में गैस कटर की मदद से चालक और कंडक्टर के शवों को बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मामूली चोटें आई हैं, उनके लिए वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था कर उन्हें उत्तर प्रदेश भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शाम तक 25 से ज्यादा लोगों को उत्तर प्रदेश भेजा जाएगा। एसपी ने कहा, मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना नहीं है।

विस्तार

मध्यप्रदेश के रीवा में हुए सड़क हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई है। आठ लोग अब भी जिंदगी से जंग लड़ रहे हैं। हृदय विदारक समाचार पढ़कर हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं कि हादसे की पीड़ा क्या रही होगी। हादसे में बचे लोगों की जुबां से जब पता चलता है कि क्या मंजर रहा होगा वो। हमने ऐसे ही कुछ लोगों से बात की, जिन्होंने घटना का आंखों देखा हाल बयां किया।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में रहने वाले सत्येंद्र प्रसाद उनमें से एक हैं। वे हैदराबाद में रहकर काम करते हैं। वे अपने चचेरे भाई और साथ काम करने वाले सात-आठ लोगों के साथ हैदराबाद से गोरखपुर जाने के लिए बस में बैठे थे। तीन दिन पहले शाम छह बजे बस हैदराबाद से निकली थी। सत्येंद्र ने बताया, हम वहां एक कंपनी में काम करते हैं। मैं और मेरा छोटा चचेरा भाई रघुवीर हैदराबाद से बस में बैठे थे। हमारे साथ काम करने वाले आठ लोग थे। जबलपुर में बस बदली थी, गोरखपुर जा रहे थे।

बस में भीड़ बहुत थी। हम सबसे पीछे ऊपर वाली सीट पर बैठे थे। बस के कैबिन में 12-15 लोग होंगे। हम लोग जाग रहे थे, बातें कर रहे थे। तभी जोरदार झटका लगा और तेज आवाज आई। हम लोग भी बुरी तरह कैबिन में ही एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। पता चल गया था कि कोई एक्सीडेंट हो गया है। चंद सेकेंड बाद ही चीखे सुनाई देने लगीं। हम लोगों ने निकलने की कोशिश की पर बस की स्थिति ऐसी नहीं थी, दरवाजे तक भी पहुंचा जा सके। हमने खिड़की तोड़ी और बाहर निकले। 

पीछे बैठे हम आठ-दस लोग ही थे, जो चलने-फिरने की स्थिति में थे। हमने पहले खुद को संभाला फिर बस की स्थिति देखी। बस 42 पहियों वाले बड़े ट्रॉले से पीछे से टकराई थी। बस के आगे का हिस्सा पूरी तरह टूट गया था। ड्राइवर के पीछे वाला कैबिन भी टूट गया था। बस की सभी सीटें निकल चुकी थी। हर तरफ खून और चीखें थीं। लग रहा था कि बस के आगे वाले हिस्से में बैठे किसी का भी बचना किसी चमत्कार से कम नहीं होगा।


फिर पुलिस और एंबलेंस आ गई, हमने मिलकर लोगों को निकाला। सत्येंद्र बताते हैं कि इतना खून देखकर मैं बुरी तरह डर गया था। फिर मुझे भी चक्कर आ गए। सड़क किनारे लेटा रहा। मुझे भी अस्पताल ले जाया गया। मेरी रीढ़ की हड्डी में चोट है पर घरवाले परेशान हो रहे हैं, इसलिए मैं यहां नहीं रुकना चाहता। दूसरी बस से घर पहुंचना चाहता हूं बस। बता दें कि सत्येंद्र गोरखपुर जिले के पिपराई थाना क्षेत्र के ग्राम टिपरही में रहते हैं।

क्या बताया सुभाष चौधर ने...
तीस साल के मजदूर सुभाष चौधरी गहरी नींद में थे और दिवाली का सपना देख रहे थे, जिसके लिए वह उत्तर प्रदेश में बस से घर जा रहे थे। लेकिन एक तेज गड़गड़ाहट ने उनकी नींद तोड़ दी और उनका सपना जल्द ही एक दुःस्वप्न में बदल गया। क्योंकि उन्होंने देखा कि लोग दर्द से कराह रहे हैं और अपने चारों ओर खून से लथपथ पड़े हैं।


चौधरी उन यात्रियों में से एक हैं, जो मध्यप्रदेश के रीवा जिले में शुक्रवार देर रात स्लीपर बस में पीछे से एक ट्रेलर-ट्रक से जा टकराई, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई और 40 घायल हो गए। हालांकि, चौधरी दुर्घटना में बाल-बाल बचे, लेकिन उनके हाथ और पैर में चोटें आईं। वह अपने प्रियजनों के साथ दिवाली मनाने के लिए हैदराबाद से उत्तर प्रदेश के अपने गृहनगर महाराजगंज जा रहे थे। लेकिन हादसे ने उनका सपना तोड़ दिया, क्योंकि उनका अब रीवा के संजय गांधी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

उन्होंने बताया, मैं गहरी नींद में सो रहा था और अपने सपने में दिवाली मना रहा था। क्योंकि रोशनी का त्योहार सिर्फ तीन दिन है। मैं साथी यात्रियों के साथ रात का खाना खाकर सो गया था। लेकिन मैं जोर से जाग गया और देखा कि कोई कह रहा भगवान मुझे बचाओ, भगवान मेरी मदद करो, बस में ऐसी ही आवाजें गूंजती रहीं। मैं दर्द से कराह रहा था और मेरे जैसे कई अन्य लोग थे। मैंने बस के अंदर खून से लथपथ असहाय लोगों को देखा। उनमें से कुछ जवाब नहीं दे रहे थे, जबकि कुछ अन्य सांस के लिए हांफ रहे थे। उन्होंने कहा, घर लौटने और त्योहार मनाने का हमारा सपना राख हो गया।

मनीष सकात ने क्या बताया...
मनीष सकात (21) भी महाराजगंज के निवासी हैं, उनके सिर और छाती पर चोट लगी है। धीमी आवाज में बोलते हुए उन्होंने कहा, बस दुर्घटना की गगनभेदी आवाज और इसके तुरंत बाद रोने की आवाज ने उन्हें भयभीत कर दिया। उन्हें अपनी आंखें बंद करने के लिए मजबूर कर दिया। न्होंने पीटीआई से कहा, मैं इतना डरा हुआ था कि मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं। उसके बाद मुझे नहीं पता कि क्या हुआ। कुछ समय बाद मुझे होश आया और मैंने खुद को संजय गांधी अस्पताल में पाया।

रीवा के पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन ने कहा, दुर्घटना में 15 लोगों की मौत हो गई और 40 घायल हुए हैं। पीड़ित ज्यादातर मजदूर थे, जो दिवाली के लिए यूपी लौट रहे थे। बस भी उसी राज्य की थी। भसीन ने बताया, बस के अगले हिस्से में गैस कटर की मदद से चालक और कंडक्टर के शवों को बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को मामूली चोटें आई हैं, उनके लिए वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था कर उन्हें उत्तर प्रदेश भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। शाम तक 25 से ज्यादा लोगों को उत्तर प्रदेश भेजा जाएगा। एसपी ने कहा, मरने वालों की संख्या बढ़ने की संभावना नहीं है।


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