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: Crime: 'सावधान इंडिया' के शो से आइडिया लेकर तीन नाबालिगों की हुई थी हत्या, मां सहित एक अन्य आरोपी को उम्रकैद

News Desk / Tue, Nov 29, 2022


(सांकेतिक तस्वीर)

(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

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गुना जिले में अदालत ने एक आरोपी मां को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है। साल 2017 में एक नाबालिग ने सिलसिलेवार तीन हत्याएं कर दी थी। इसमे उसकी मां और दोस्त ने भी साथ दिया था। तीनों हत्याएं अलग-अलग दिनों में हुई थी। एक हत्या का राज छुपाने के लिए दो और हत्याएं की गईं। पांच साल बाद इस मामले में फैसला आया। कोर्ट ने उसकी मां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इससे पहले अगस्त महीने में एक आरोपी को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

इस पूरी कहानी की शुरुआत उस समय हुई, जब सिंचाई विभाग में पदस्थ ऑफिस अधीक्षक अंतर सिंह मीना का इकलौता बेटा हेमंत (17) साजिश का शिकार हुआ। वह घर से सेकंड हैंड बाइक खरीदने के लिए 40 हजार रुपये लेकर निकला। इसके बाद लापता हो गया। दूसरे दिन ही पिता ने महिला पूनम दुबे और उसके नाबालिग बेटे पर शक जताया। पिता ने बताया कि उनका बेटा अपने दोस्त के साथ पैसे लेकर निकला था। पुलिस ने पिता की शिकायत पर गुमशुदगी दर्जकर जांच शुरू की। सभी एंगल से जांच में जुटी पुलिस तब चौकन्नी हुई, जब हेमंत की फिरौती का फोन आया।

नाबालिग दोस्त हनी दुबे ने ही दगा किया...
दरअसल, हेमंत से उसके नाबालिग दोस्त हनी दुबे ने ही दगा किया। मां पूनम और एक अन्य नाबालिग साथी की मदद से हेमंत से 40 हजार रुपये छीन लिए और उसकी गला और हाथ काटकर हत्या कर दी। सबूत मिटाने के लिए शव को जला दिया। इसके बाद पूनम ने उसके दोस्त लोकेश और ऋतिक को लालच दिया कि किसी को कुछ नहीं बताना। फिरौती की रकम में से तुम्हारा भी हिस्सा रहेगा।

मृतक हेमंत का मोबाइल ऋतिक को दिया और उससे कहा कि गुना से दूर इंदौर जाकर हेमंत के पिता अंतर सिंह को धमकी देना कि तुम्हारा बेटा हमारे कब्जे में हैं और उससे पचास लाख की फिरौती की बात करना। ताकि पुलिस का ध्यान गुना से हटकर इंदौर पर चला जाए। सबूत मिटाने और पुलिस तफ्तीश को भटकाने का आइडिया हत्यारों को सावधान इंडिया के शो से आया था।

विस्तार

गुना जिले में अदालत ने एक आरोपी मां को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है। साल 2017 में एक नाबालिग ने सिलसिलेवार तीन हत्याएं कर दी थी। इसमे उसकी मां और दोस्त ने भी साथ दिया था। तीनों हत्याएं अलग-अलग दिनों में हुई थी। एक हत्या का राज छुपाने के लिए दो और हत्याएं की गईं। पांच साल बाद इस मामले में फैसला आया। कोर्ट ने उसकी मां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इससे पहले अगस्त महीने में एक आरोपी को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।

इस पूरी कहानी की शुरुआत उस समय हुई, जब सिंचाई विभाग में पदस्थ ऑफिस अधीक्षक अंतर सिंह मीना का इकलौता बेटा हेमंत (17) साजिश का शिकार हुआ। वह घर से सेकंड हैंड बाइक खरीदने के लिए 40 हजार रुपये लेकर निकला। इसके बाद लापता हो गया। दूसरे दिन ही पिता ने महिला पूनम दुबे और उसके नाबालिग बेटे पर शक जताया। पिता ने बताया कि उनका बेटा अपने दोस्त के साथ पैसे लेकर निकला था। पुलिस ने पिता की शिकायत पर गुमशुदगी दर्जकर जांच शुरू की। सभी एंगल से जांच में जुटी पुलिस तब चौकन्नी हुई, जब हेमंत की फिरौती का फोन आया।

नाबालिग दोस्त हनी दुबे ने ही दगा किया...
दरअसल, हेमंत से उसके नाबालिग दोस्त हनी दुबे ने ही दगा किया। मां पूनम और एक अन्य नाबालिग साथी की मदद से हेमंत से 40 हजार रुपये छीन लिए और उसकी गला और हाथ काटकर हत्या कर दी। सबूत मिटाने के लिए शव को जला दिया। इसके बाद पूनम ने उसके दोस्त लोकेश और ऋतिक को लालच दिया कि किसी को कुछ नहीं बताना। फिरौती की रकम में से तुम्हारा भी हिस्सा रहेगा।

मृतक हेमंत का मोबाइल ऋतिक को दिया और उससे कहा कि गुना से दूर इंदौर जाकर हेमंत के पिता अंतर सिंह को धमकी देना कि तुम्हारा बेटा हमारे कब्जे में हैं और उससे पचास लाख की फिरौती की बात करना। ताकि पुलिस का ध्यान गुना से हटकर इंदौर पर चला जाए। सबूत मिटाने और पुलिस तफ्तीश को भटकाने का आइडिया हत्यारों को सावधान इंडिया के शो से आया था।


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