पीएफआई पर बैन
- फोटो : सोशल मीडिया
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सिमी के बाद अब कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को भी देश में पांच साल के लिए बैन कर दिया है। इससे पहले मध्यप्रदेश में पीएफआई पर सप्ताह में दूसरी बार कार्रवाई की गई। मंगलवार को प्रदेश के 8 शहरों में पीएफआई के 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें पेंटर, मैकेनिक, मजदूर, कपड़े बेचने वाले, टायर की दुकान से लेकर पत्रकार, डॉक्टर, टीचर, अकाउंटेट को पीएफआई ने बड़े-बड़े पद देकर लीडर बना रखा था। पीएफआई संगठन का विस्तार करने के लिए छोटे-छोटे लोगों को जोड़ रहा था। जिनकी आम लोगों के घरों तक सीधे पहुंच हो। ऐसे लोगों पर कोई शक नहीं करता था। लेकिन मालवा क्षेत्र की सांप्रदायिक घटना के बाद से एजेंसियों की ऐसे लोगों की गतिविधियों पर नजर थी। एनआईए और एटीएस की इनपुट पर जिला पुलिस ने कार्रवाई कर मंगलवार को मध्यप्रदेश में 21 पीएफआई और एसडीपीआई के नेताओं को गिरफ्तार किया। इनके पास से दस्तावेज, मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए। पुलिस फिलहाल सभी एंगलों पर जांच कर रही है।
राजस्थान से जुड़े जिलों में विस्तार
प्रदेश में पीएफआई राजस्थान बॉर्डर से सटे जिलों में अपना नेटवर्क खड़ा कर रहा था। पुलिस ने इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, गुना, श्योपुर, नीमच में छापेमारी कर पीएफआई के नेताओं को गिरफ्तार किया। इनकी राजस्थान के कोटा से एमपी में नेटवर्क चलाने की योजना थी। इससे पहले एनआईए और एमपी एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में एमपी से चार पीएफआई पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था।
अनब्रेकेबल एप से करते थे बात
इंदौर से गिरफ्तार पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नेताओं के मोबाइल में पुलिस को बातचीत करने के नए-नए एप मिले हैं। इन पर होने वाली बातचीत का एजेंसियां पता नहीं लगा पाती हैं। अब एजेंसियां आरोपियों की कॉल डिटेल, चैटिंग और अन्य इंटरनेट एप की बारिकी से जांच कर रही हैं। ताकि संगठन की गतिविधियों और आगे की रणनीति को लेकर और सबूत जुटाए जा सकें।
पूरी तरह नकेल कसने तक कार्रवाई होगी
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में पहले इस संगठन के 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसके 21 सदस्य पकड़े गए। अब आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी। जैसे जैसे पूछताछ में नाम सामने आते जाएंगे संगठन और उसके स्लीपर सेल के सदस्यों पर कार्रवाई की जाएगी। पीएफआई पर पूरी तरह नकेल कसने तक यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
आतंकी संगठन आईएसआईएस से संबंध
गृह मंत्री ने कहा कि प्रदेश शांति का टापू है यहां हमने देश विरोधी किसी संगठन को कभी पनपने नहीं दिया। सिमी जैसे संगठन पहले ही खत्म कर दिए गए थे, अब पीएफआई को भी हम इतिहास बना देंगे। उन्होंने कहा कि पीएफआई देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा था। जो सबूत मिले है, उसमे इस संगठन की केरल, कर्नाटक सहित कई राज्यो में हुई हत्याओं में हाथ था। आतंकी संगठन आईएसआईएस से भी इसका संबंध था। इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाना जरूरी था।
यूएपीए एक्ट के तहत प्रतिबंध
पीएफआई की आतंकी फंडिंग व अन्य गतिविधियों के चलते भारत में पांच साल के लिए यूएपीए एक्ट के तहत प्रतिबंध लगाया गया है। बता दें कि PFI एक कट्टरपंथी संगठन है। पीएफआई 2006 में अस्तित्व में आया। 2017 में NIA ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। NIA जांच में इस संगठन के कथित रूप से हिंसक और आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के बात आई थी। NIA के डोजियर के मुताबिक यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया।
विस्तार
सिमी के बाद अब कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को भी देश में पांच साल के लिए बैन कर दिया है। इससे पहले मध्यप्रदेश में पीएफआई पर सप्ताह में दूसरी बार कार्रवाई की गई। मंगलवार को प्रदेश के 8 शहरों में पीएफआई के 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें पेंटर, मैकेनिक, मजदूर, कपड़े बेचने वाले, टायर की दुकान से लेकर पत्रकार, डॉक्टर, टीचर, अकाउंटेट को पीएफआई ने बड़े-बड़े पद देकर लीडर बना रखा था। पीएफआई संगठन का विस्तार करने के लिए छोटे-छोटे लोगों को जोड़ रहा था। जिनकी आम लोगों के घरों तक सीधे पहुंच हो। ऐसे लोगों पर कोई शक नहीं करता था। लेकिन मालवा क्षेत्र की सांप्रदायिक घटना के बाद से एजेंसियों की ऐसे लोगों की गतिविधियों पर नजर थी। एनआईए और एटीएस की इनपुट पर जिला पुलिस ने कार्रवाई कर मंगलवार को मध्यप्रदेश में 21 पीएफआई और एसडीपीआई के नेताओं को गिरफ्तार किया। इनके पास से दस्तावेज, मोबाइल, लैपटॉप और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए। पुलिस फिलहाल सभी एंगलों पर जांच कर रही है।
राजस्थान से जुड़े जिलों में विस्तार
प्रदेश में पीएफआई राजस्थान बॉर्डर से सटे जिलों में अपना नेटवर्क खड़ा कर रहा था। पुलिस ने इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, गुना, श्योपुर, नीमच में छापेमारी कर पीएफआई के नेताओं को गिरफ्तार किया। इनकी राजस्थान के कोटा से एमपी में नेटवर्क चलाने की योजना थी। इससे पहले एनआईए और एमपी एटीएस की संयुक्त कार्रवाई में एमपी से चार पीएफआई पदाधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था।
अनब्रेकेबल एप से करते थे बात
इंदौर से गिरफ्तार पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के नेताओं के मोबाइल में पुलिस को बातचीत करने के नए-नए एप मिले हैं। इन पर होने वाली बातचीत का एजेंसियां पता नहीं लगा पाती हैं। अब एजेंसियां आरोपियों की कॉल डिटेल, चैटिंग और अन्य इंटरनेट एप की बारिकी से जांच कर रही हैं। ताकि संगठन की गतिविधियों और आगे की रणनीति को लेकर और सबूत जुटाए जा सकें।
पूरी तरह नकेल कसने तक कार्रवाई होगी
गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि प्रदेश में पहले इस संगठन के 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसके 21 सदस्य पकड़े गए। अब आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेगी। जैसे जैसे पूछताछ में नाम सामने आते जाएंगे संगठन और उसके स्लीपर सेल के सदस्यों पर कार्रवाई की जाएगी। पीएफआई पर पूरी तरह नकेल कसने तक यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
आतंकी संगठन आईएसआईएस से संबंध
गृह मंत्री ने कहा कि प्रदेश शांति का टापू है यहां हमने देश विरोधी किसी संगठन को कभी पनपने नहीं दिया। सिमी जैसे संगठन पहले ही खत्म कर दिए गए थे, अब पीएफआई को भी हम इतिहास बना देंगे। उन्होंने कहा कि पीएफआई देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा था। जो सबूत मिले है, उसमे इस संगठन की केरल, कर्नाटक सहित कई राज्यो में हुई हत्याओं में हाथ था। आतंकी संगठन आईएसआईएस से भी इसका संबंध था। इसलिए इस पर प्रतिबंध लगाना जरूरी था।
यूएपीए एक्ट के तहत प्रतिबंध
पीएफआई की आतंकी फंडिंग व अन्य गतिविधियों के चलते भारत में पांच साल के लिए यूएपीए एक्ट के तहत प्रतिबंध लगाया गया है। बता दें कि PFI एक कट्टरपंथी संगठन है। पीएफआई 2006 में अस्तित्व में आया। 2017 में NIA ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। NIA जांच में इस संगठन के कथित रूप से हिंसक और आतंकी गतिविधियों में लिप्त होने के बात आई थी। NIA के डोजियर के मुताबिक यह संगठन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया।
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