हॉस्टल में खौलती दाल से जले छात्र, दर्द से तड़पते रहे : गरियाबंद में हाथ-पैर और चेहरे की चमड़ियां छिलीं; परीक्षा भी छूटी, क्या वार्डन ने लगाई थी ड्यूटी?
गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मदनपुर में संचालित आदिवासी छात्रावास में 9वीं कक्षा के दो छात्र गर्म दाल से झुलस गए। घटना 19 सितंबर की है। छात्र ओंकार ध्रुव और मुरली रसोई कक्ष में रखे दाल के कुकर को खोल रहे थे, तभी गर्म दाल गिरने से दोनों के हाथ, पैर और चेहरा झुलस गया। हादसे के बाद दोनों छात्रों का जिला अस्पताल में इलाज कराया गया।
मामला सिर्फ छात्रों के झुलसने तक सीमित नहीं है। आरोप है कि इतनी गंभीर घटना के बाद भी छात्रावास प्रबंधन ने उनके परिजनों को तत्काल जानकारी नहीं दी। छात्रों को अस्पताल में उपचार के बाद गुपचुप तरीके से बेड रेस्ट कराया जाता रहा। इस दौरान उनके परिजन इस बात से अनजान रहे कि छात्रावास में उनके बच्चों के साथ क्या हुआ है।

गर्म दाल से झुलसे, दर्द सहते रहे छात्र
भूख लगने पर दोनों छात्र रसोई कक्ष में पहुंचे थे। वहां रखे दाल के कुकर को खोलते समय अचानक गर्म दाल गिर गई। देखते ही देखते दोनों छात्र झुलस गए। गर्म दाल के संपर्क में आने से उनके हाथ, पैर और चेहरे पर चोट आई।
छात्रावास में रसोइयों की मौजूदगी के बावजूद यह हादसा कैसे हुआ, यही सबसे बड़ा सवाल है। अगर रसोई में खाना बनाया और परोसा जाता है तो छात्रों के वहां पहुंचने और गर्म कुकर खोलने की स्थिति कैसे बनी, इसकी जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है।
हादसे के बाद छात्रों को जिला अस्पताल ले जाकर उपचार कराया गया। लेकिन इसके बाद जिस तरह से मामले को संभाला गया, उस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

परिजनों को नहीं दी जानकारी, परीक्षा भी छूटी
परिजनों का आरोप है कि बच्चों के साथ हुई घटना की जानकारी उन्हें तत्काल नहीं दी गई। छात्रों को बेड रेस्ट कराया जाता रहा और परिवार को इस गंभीर हादसे की जानकारी नहीं मिल सकी।
इसका असर छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ा। हादसे के कारण दोनों छात्र त्रैमासिक परीक्षा में शामिल नहीं हो सके। एक तरफ बच्चे झुलसने का दर्द सह रहे थे, दूसरी तरफ उनकी परीक्षा छूट गई। छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रहे इन बच्चों के लिए यह स्थिति और मुश्किल हो गई।
बच्चों ने खुद फोन कर बताई घटना
मामला तब सामने आया, जब घायल छात्रों ने अपने पालकों को फोन कर घटना की जानकारी दी। बच्चों से हादसे की बात पता चलने के बाद परिजनों को पूरे मामले की जानकारी हुई।
इसके बाद दोनों छात्रों को परिजन अपने साथ घर ले गए। फिलहाल उनका इलाज घर पर ही कराया जा रहा है। बच्चों के झुलसने और घटना की जानकारी समय पर नहीं मिलने से परिजन भी परेशान हैं।

आला अफसरों को जानकारी, फिर भी कार्रवाई नहीं
घटना की जानकारी विभाग के आला अफसरों तक पहुंचने के बावजूद अब तक किसी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है। यही वजह है कि मामले में लीपापोती किए जाने के आरोप भी लग रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्रावास में रसोइयों के रहते 9वीं कक्षा के दो छात्र गर्म दाल के कुकर तक कैसे पहुंचे और हादसे के बाद उनके परिजनों को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई। यदि बच्चों के साथ हुई घटना की जानकारी समय पर परिवार को दी जाती तो वे अपने बच्चों के इलाज और देखभाल के लिए तुरंत पहुंच सकते थे।
पिता ने की जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
पीड़ित छात्र के पिता ने मामले में लापरवाही बरतने वाले लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी छात्रावास प्रबंधन की है। ऐसे में हादसा किन परिस्थितियों में हुआ और घटना के बाद परिजनों को सूचना क्यों नहीं दी गई, इसकी जांच होनी चाहिए।
अब परिजनों की मांग है कि पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई हो। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि छात्रावास में बच्चों की सुरक्षा के लिए तय व्यवस्था के बावजूद आखिर ऐसी घटना कैसे हुई।
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