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: MP News: राजनीति से पहले व्यापार में हाथ आजमा चुके हैं कैलाश विजयवर्गीय, उनसे जुड़ी ये बात नहीं जानते होंगे आप

News Desk / Sat, Oct 22, 2022


अपनी दुकान में सामान तौलते विजयवर्गीय

अपनी दुकान में सामान तौलते विजयवर्गीय - फोटो : अमर उजाला

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80 के दशक में पार्षद का चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बनकर केंद्र की राजनीति में स्थापित हो चुके हैं। वे विधायक भी रहे हैं और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। विजयवर्गीय हर साल धनतेरस पर अपनी परंपरागत किराना दुकान पर जाकर मुर्हूत में सामान बेचते हैं। वे हर साल ऐसा करते हैं। बहुत कम लोगों को मालूम है कि विजयवर्गीय राजनीति से पहले कारोबार में भी हाथ आजमाया, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली। विजयवर्गीय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री व दिवंगत नेता अनिल माधव दवे के साथ साझेदारी में कोल्ड ड्रिंक का बिजनेस किया। उन्होंने पीथमपुर में एक प्लांट भी डाला, लेकिन कारोबार में ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ। 

पटाखे और साबुन भी बेच चुके हैं
पटाखे का धंधा सबसे मुनाफे का धंधा माना जाता है। विजयवर्गीय ने इस धंधे में भी हाथ आजमाया और कुछ वर्षों तक पटाखे भी बेचे। इसके अलावा एक सूर्या ब्रांड के साबुन की एजेंसी भी उन्होंने ले रखी थी और साबुन भी बेचे, लेकिन राजनीति की तरफ भी झुकाव रहा। 1983 में भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र धारकर ने नंदानगर वॉर्ड से उन्हें पार्षद का टिकट दिया था। तब उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार बाबू सिंह डंगर को चुनाव हराया था। उसके बाद भाजपा ने उन्हें चार नंबर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधानसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया था। विधायक बनने के बाद विजयवर्गीय ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा, हालांकि राजनीति में उन्होंने काफी उतार-चढ़ाव देखे। उन्होंने क्रिकेट की राजनीति में भी हाथ आजमाया, और ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का दो बार चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों बार वे चुनाव हार गए।

विस्तार

80 के दशक में पार्षद का चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले कैलाश विजयवर्गीय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बनकर केंद्र की राजनीति में स्थापित हो चुके हैं। वे विधायक भी रहे हैं और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। विजयवर्गीय हर साल धनतेरस पर अपनी परंपरागत किराना दुकान पर जाकर मुर्हूत में सामान बेचते हैं। वे हर साल ऐसा करते हैं। बहुत कम लोगों को मालूम है कि विजयवर्गीय राजनीति से पहले कारोबार में भी हाथ आजमाया, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली। विजयवर्गीय ने पूर्व केंद्रीय मंत्री व दिवंगत नेता अनिल माधव दवे के साथ साझेदारी में कोल्ड ड्रिंक का बिजनेस किया। उन्होंने पीथमपुर में एक प्लांट भी डाला, लेकिन कारोबार में ज्यादा मुनाफा नहीं हुआ। 

पटाखे और साबुन भी बेच चुके हैं
पटाखे का धंधा सबसे मुनाफे का धंधा माना जाता है। विजयवर्गीय ने इस धंधे में भी हाथ आजमाया और कुछ वर्षों तक पटाखे भी बेचे। इसके अलावा एक सूर्या ब्रांड के साबुन की एजेंसी भी उन्होंने ले रखी थी और साबुन भी बेचे, लेकिन राजनीति की तरफ भी झुकाव रहा। 1983 में भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र धारकर ने नंदानगर वॉर्ड से उन्हें पार्षद का टिकट दिया था। तब उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार बाबू सिंह डंगर को चुनाव हराया था। उसके बाद भाजपा ने उन्हें चार नंबर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधानसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया था। विधायक बनने के बाद विजयवर्गीय ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा, हालांकि राजनीति में उन्होंने काफी उतार-चढ़ाव देखे। उन्होंने क्रिकेट की राजनीति में भी हाथ आजमाया, और ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का दो बार चुनाव लड़ा था, लेकिन दोनों बार वे चुनाव हार गए।


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