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: MP News: जल संसाधन विभाग के 19 कर्मचारी मेडिकल क्लेम लेने फर्जी बिल लगाने के दोषी, 10 की सेवा समाप्त

News Desk / Sat, Oct 1, 2022


मंत्रालय भवन, वल्लभ भवन, भोपाल

मंत्रालय भवन, वल्लभ भवन, भोपाल - फोटो : File

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जल संसाधन विभाग के 19 कर्मचारियों को फर्जी मेडिकल क्लेम लगाने का कोर्ट ने दोषी माना है। आरोपियों को तीन और पांच साल की सजा सुनाई गई है। वहीं, विभाग ने दोषी कर्मचारियों में 10 के खिलाफ सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की है। वहीं, रिटायर्ड 9 कर्मचारियों की पेंशन रोक दी है। कोर्ट ने कर्मचारियों को 16 सितंबर को सजा सुनाई। इस दौरान कोर्ट में मौजूद कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया।

विभाग ने 10 की सेवा समाप्त की 
जल संसाधन विभाग के ईएनसी मदन सिंह डाबर ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ 29 सितंबर को आदेश जारी किए। इसमें निज सहायक बीएस सैयाम, निज सहायक रामप्यारी सोनी, सहायक वर्ग-2 विजय कनौजिया, सहायक वर्ग-2 शिवकुमारी, सहायक वर्ग-3 विजय कुमार तुरकई, सहायक वर्ग-3 सुगंधामणी, वाहन चालक अशोक मार्कोस, भृत्य सुनील मालवीय, भृत्य रविन्द्र ढोके, भृत्य कुंजबिहारी की सेवा समाप्त करने के आदेश जारी किए। वहीं, कार्यभारित कर्मचारी स्वीपर रामकली बाई के लिए अलग से आदेश जारी करने की बात कही है।

9 रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन रोकी 
इसके अलावा रिटायर्ड कर्मचारियों में सहायक वर्ग-1 डीएस सोनी, सहायक वर्ग-1 क्रिस्टीना मिंज, सहायक वर्ग-2 कैलाश वर्मा, सहायक वर्ग-2 शिवकुमारी, सहायक वर्ग-3 आशा जैन, सहायक वर्ग-3 सरसम्मा, सहायक वर्ग-3 राकेश दत्ता, सेवानिवृत्त प्यून ऐजाज अहमद और रामलाल गुप्ता की पेंशन रोकने के आदेश जारी किए है।
 
यह है मामला

जल संसाधन विभाग में 2011 में दोषी कर्मचारियों के मेडिकल क्लेम के फर्जी बिल लगाने का मामला सामने आया था। इसकी जांच के लिए 27 मार्च 2011 को आदेश हुए थे। 1 फरवरी 2011 को जांच समिति गठित की गई। समिति ने मेडिकल क्लेम के बिलों को सत्यापन के लिए संयुक्त संचालक वं अधीक्षक हमीदिया अस्पताल को भोपाल को भेजा था। जिसे उनके द्वारा फर्जी बताया गया। इसके आधार पर विभाग की तरफ से एमपी नगर थाने में आईपीसी की धारा 420, 467 और 471 में केस दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने जांच कर चालान कोर्ट में पेश किया। जहां दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने 19 कर्मचारियों को दोषी पाया।
 

विस्तार

जल संसाधन विभाग के 19 कर्मचारियों को फर्जी मेडिकल क्लेम लगाने का कोर्ट ने दोषी माना है। आरोपियों को तीन और पांच साल की सजा सुनाई गई है। वहीं, विभाग ने दोषी कर्मचारियों में 10 के खिलाफ सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की है। वहीं, रिटायर्ड 9 कर्मचारियों की पेंशन रोक दी है। कोर्ट ने कर्मचारियों को 16 सितंबर को सजा सुनाई। इस दौरान कोर्ट में मौजूद कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया।

विभाग ने 10 की सेवा समाप्त की 
जल संसाधन विभाग के ईएनसी मदन सिंह डाबर ने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ 29 सितंबर को आदेश जारी किए। इसमें निज सहायक बीएस सैयाम, निज सहायक रामप्यारी सोनी, सहायक वर्ग-2 विजय कनौजिया, सहायक वर्ग-2 शिवकुमारी, सहायक वर्ग-3 विजय कुमार तुरकई, सहायक वर्ग-3 सुगंधामणी, वाहन चालक अशोक मार्कोस, भृत्य सुनील मालवीय, भृत्य रविन्द्र ढोके, भृत्य कुंजबिहारी की सेवा समाप्त करने के आदेश जारी किए। वहीं, कार्यभारित कर्मचारी स्वीपर रामकली बाई के लिए अलग से आदेश जारी करने की बात कही है।

9 रिटायर्ड कर्मचारियों की पेंशन रोकी 
इसके अलावा रिटायर्ड कर्मचारियों में सहायक वर्ग-1 डीएस सोनी, सहायक वर्ग-1 क्रिस्टीना मिंज, सहायक वर्ग-2 कैलाश वर्मा, सहायक वर्ग-2 शिवकुमारी, सहायक वर्ग-3 आशा जैन, सहायक वर्ग-3 सरसम्मा, सहायक वर्ग-3 राकेश दत्ता, सेवानिवृत्त प्यून ऐजाज अहमद और रामलाल गुप्ता की पेंशन रोकने के आदेश जारी किए है।
 
यह है मामला

जल संसाधन विभाग में 2011 में दोषी कर्मचारियों के मेडिकल क्लेम के फर्जी बिल लगाने का मामला सामने आया था। इसकी जांच के लिए 27 मार्च 2011 को आदेश हुए थे। 1 फरवरी 2011 को जांच समिति गठित की गई। समिति ने मेडिकल क्लेम के बिलों को सत्यापन के लिए संयुक्त संचालक वं अधीक्षक हमीदिया अस्पताल को भोपाल को भेजा था। जिसे उनके द्वारा फर्जी बताया गया। इसके आधार पर विभाग की तरफ से एमपी नगर थाने में आईपीसी की धारा 420, 467 और 471 में केस दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने जांच कर चालान कोर्ट में पेश किया। जहां दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने 19 कर्मचारियों को दोषी पाया।
 


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